एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 3600 MBBS इंटर्न्स की हड़ताल शुरू, स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न्स ने अपनी मांगों को लेकर काम बंद कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। प्रदेश के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के करीब 3600 एमबीबीएस इंटर्न्स इस आंदोलन में शामिल हैं, जिसके चलते अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना शुरू हो गया है। हालांकि, आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाएं जारी रखी गई हैं, लेकिन नियमित कामकाज और ओपीडी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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3600 इंटर्न्स हड़ताल पर: प्रदेशभर के 13 सरकारी मेडिकल कॉलेजों के इंटर्न्स ने काम का बहिष्कार कर दिया है।
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मुख्य मांग: इंटर्न्स का वर्तमान मासिक स्टाइपेंड मात्र 14,000 रुपये है, जिसे बढ़ाकर 30,000 रुपये किए जाने की मुख्य मांग की जा रही है।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर असर: हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी, लेकिन यदि पीजी (PG) डॉक्टरों ने भी समर्थन करते हुए ओपीडी सेवाएं बंद करने का फैसला लिया, तो अस्पतालों में संकट और गहरा सकता है।
क्या है प्रमुख मांग और कारण?
इंटर्न्स लंबे समय से अपने मानदेय (Stipend) में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में वर्तमान में मिलने वाला 14,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड बहुत कम है, जबकि वे अस्पतालों में अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा और लंबे समय तक देते हैं। इसी विसंगति को दूर करने के लिए स्टाइपेंड को बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने की मांग को लेकर यह कदम उठाया गया है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव की आशंका
अस्पतालों में जूनियर और इंटर्न्स डॉक्टर चिकित्सा व्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनके काम बंद करने से वार्डों का रूटीन वर्क और ओपीडी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। यदि पीजी डॉक्टर्स भी इस हड़ताल के समर्थन में उतरते हैं, तो आने वाले दिनों में मरीजों की मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती हैं। प्रशासन स्तर पर इस हड़ताल के समाधान को लेकर बातचीत के प्रयास जारी हैं।




