एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर शिकंजा: यूरोपीय संघ (EU) में AI से जुड़े कड़े नियम लागू, डीपफेक और फर्जी कंटेंट पर लगेगी लगाम
ब्रसेल्स: दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए यूरोपीय संघ (EU) ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। EU ने AI से जुड़े बेहद कड़े नए नियम लागू कर दिए हैं, जो 2 अगस्त से पूरे यूरोपीय संघ में प्रभावी हो चुके हैं। इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य डीपफेक जैसी समस्याओं से निपटना, कंपनियों की जवाबदेही तय करना और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
नए नियम लागू: यूरोपीय संघ में 2 अगस्त से AI से जुड़े कड़े नियम लागू कर दिए गए हैं, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
-
डीपफेक पर सख्त पाबंदी: किसी भी AI-जनरेटेड या एडिटेड वीडियो, ऑडियो और फोटो पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि असली और नकली की पहचान हो सके।
-
चैटबॉट्स की पारदर्शिता: यदि यूजर किसी AI चैटबॉट या वर्चुअल असिस्टेंट से बात कर रहा है, तो उसे पहले ही स्पष्ट करना होगा कि सामने इंसान नहीं बल्कि AI है।
-
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया: जहां एक ओर इन नियमों से पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं टेक इंडस्ट्री का मानना है कि कड़े अनुपालन (Compliance) से छोटे डेवलपर्स के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
क्या हैं यूरोपीय संघ के नए AI नियम?
हाल के वर्षों में डीपफेक तकनीक के जरिए किसी व्यक्ति की नकली फोटो, आवाज या वीडियो बनाकर फर्जी खबरें फैलाने और चुनाव प्रभावित करने के मामले तेजी से बढ़े हैं। इनसे निपटने के लिए EU ने निम्नलिखित प्रावधान किए हैं:
-
AI कंटेंट की लेबलिंग: अगर किसी फोटो, वीडियो, ऑडियो या टेक्स्ट को तैयार करने में AI की मुख्य भूमिका रही है, तो उस पर ‘AI-Generated’ या स्पष्ट रूप से लेबल लगाना जरूरी होगा। असली कंटेंट को भी यदि AI से इस तरह बदला गया है कि वह असली लगे, तो उसे भी मार्क करना होगा।
-
चैटबॉट्स और वर्चुअल असिस्टेंट: यूजर को यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वह किसी इंसान से नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बातचीत कर रहा है, ताकि डिजिटल सेवाओं में भरोसा बना रहे।
-
संवेदनशील AI सिस्टम पर नजर: जो AI सिस्टम लोगों की भावनाओं का विश्लेषण करते हैं या बायोमेट्रिक डेटा का उपयोग करते हैं, उनके संचालन पर कड़ी नजर रखी जाएगी।
AI कंपनियों पर बढ़ेंगी जिम्मेदारियां
नियम केवल कंटेंट क्रिएटर्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बड़े AI मॉडल विकसित करने वाली कंपनियों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली गई हैं। कंपनियों को अपने मॉडल्स से जुड़ी तकनीकी जानकारी सुरक्षित रखनी होगी, ट्रेनिंग डेटा का सारांश (Summary) सार्वजनिक करना होगा और कॉपीराइट नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
यदि कोई कंपनी या प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसे भारी-भरकम जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। बड़े मामलों में लाखों-करोड़ों यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ के ये नियम आने वाले समय में दुनिया के अन्य देशों के लिए भी एक मिसाल बन सकते हैं।




