भोपाल। मॉडल और एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में सीबीआई की गिरफ्तारी कार्रवाई के बाद पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सीबीआई द्वारा गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को पुलिस रिमांड पर लिए जाने के बाद अब उनके न्यायिक करियर का अंतिम फैसला भी चर्चा का विषय बन गया है।
यह फैसला भोपाल के चर्चित फैज कुरैशी हत्याकांड से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने हत्या के आरोपी शफीक कुरैशी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
क्या था मामला?
25 जुलाई 2021 की रात तलैया थाना क्षेत्र स्थित ईदगाह स्कूल ग्राउंड के पास फैज कुरैशी पर चाकू से हमला हुआ था। गंभीर रूप से घायल फैज की अस्पताल में मौत हो गई थी। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर शफीक कुरैशी को गिरफ्तार किया था और चाकू सहित अन्य सामग्री बरामद करने का दावा किया था।
13 फरवरी 2023 को सुनाया था फैसला
पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने 13 फरवरी 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष हत्या का आरोप संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
अदालत ने माना था कि:
– प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान भरोसेमंद नहीं रहे, वो अदालत में मुकर गए थे।
– वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर्याप्त नहीं थे।
– एफएसएल रिपोर्ट आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट नहीं कर सकी।
– केवल पुलिस अधिकारियों के बयानों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता।
गवाहों के मुकरने से कमजोर पड़ा केस
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को बड़ा झटका तब लगा जब प्रमुख गवाह अमान कुरैशी, अफसान कुरैशी, जीशान और समीर अपने पुराने बयानों से मुकर गए। किसी भी गवाह ने अदालत में यह स्वीकार नहीं किया कि उसने आरोपी को हमला करते देखा था।
एफएसएल रिपोर्ट पर भी उठे सवाल
फैसले में अदालत ने कहा था कि फॉरेंसिक रिपोर्ट अभियोजन के दावों को निर्णायक रूप से साबित नहीं करती। ऐसे में आरोपी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं थे।
सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का दिया था हवाला
अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के उस स्थापित सिद्धांत का उल्लेख किया था, जिसके अनुसार अभियोजन को आरोप संदेह से परे साबित करना होता है और हर उचित संदेह का लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए।
इन्हीं आधारों पर शफीक कुरैशी को हत्या के आरोप से दोषमुक्त कर दिया गया था।
गिरिबाला सिंह ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के आरोप से दोषमुक्त किया था
पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने 13 फरवरी 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष शफीक कुरैशी के खिलाफ हत्या का आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। प्रत्यक्षदर्शी गवाहों, वैज्ञानिक साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी की संलिप्तता प्रमाणित नहीं होती। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया था। अब ट्विशा शर्मा मामले में सीबीआई की कार्रवाई के बाद गिरिबाला सिंह के इसी फैसले की फिर से चर्चा होने लगी है।
अब क्यों चर्चा में है यह फैसला?
त्विषा शर्मा मौत मामले में सीबीआई की जांच के केंद्र में आईं पूर्व जज गिरिबाला सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनके करियर के अहम और चर्चित फैसलों की भी समीक्षा होने लगी है। ऐसे में फैज कुरैशी हत्याकांड का यह फैसला एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में आ गया है।




