एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
PWD में प्रमोशन फोल्डर में हेरफेर का बड़ा मामला: PS सुखवीर सिंह ने SO दयानंद उपाध्याय को हटाया, 23 पदों की DPC अटकी
भोपाल: मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में इंजीनियरों की विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकों में दस्तावेजों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और जालसाजी का मामला सामने आया है। इस बड़े प्रशासनिक घोटाले के बाद प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने सख्त कार्रवाई करते हुए विभाग में पदस्थ अनुभाग अधिकारी (SO) दयानंद उपाध्याय को एकतरफा कार्यमुक्त कर उनकी सेवाएं सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को सौंप दी हैं। गड़बड़ी उजागर होने के बाद 23 पदों के लिए होने वाली DPC की प्रक्रिया फिलहाल पूरी तरह अटक गई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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प्रशासनिक गाज गिरी: PWD के प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह ने अनुभाग अधिकारी दयानंद उपाध्याय को हटाकर उनकी सेवाएं GAD को वापस कर दी हैं।
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फाइलों में हेरफेर: सहायक अभियंता (AE) से कार्यपालन अभियंता (EE) और अधीक्षण अभियंता (SE) से मुख्य अभियंता (CE) के प्रमोशन फोल्डरों में गंभीर गड़बड़ियां पकड़ी गईं।
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सीआर (CR) में जालसाजी: मूल दस्तावेजों में ‘क’ श्रेणी को बदलकर ‘क प्लस’ किया गया था, साथ ही कई अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच (DI) को भी छिपा दिया गया था।
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23 पदों की DPC रद्द: मुख्य सचिव स्तर पर मामला पकड़ में आने के बाद डीपीसी रद्द कर दी गई, जिससे 21 एसई (SE) के प्रमोशन का रास्ता फिलहाल रुक गया है।
कैसे पकड़ा गया हेरफेर का पूरा खेल?
पदोन्नति प्रक्रिया के दौरान तैयार किए गए फोल्डरों में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई थीं, जिसका खुलासा इस प्रकार हुआ:
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विभागीय जांच (DI) छिपाना: AE से EE पदोन्नति के लिए तैयार किए गए दस्तावेजों में कई अधिकारियों के खिलाफ लंबित जांच के मामलों को जानबूझकर दबाया गया था ताकि DPC में कोई रुकावट न आए।
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गोपनीय प्रतिवेदन (CR) में फेरबदल: SE से CE की पदोन्नति के समय जब मूल दस्तावेजों का मिलान किया गया, तो चौंकाने वाली जालसाजी सामने आई। जिस अधिकारी की मूल सीआर में ‘क’ ग्रेड दर्ज था, उसे फोल्डर में छेड़छाड़ कर ‘क प्लस’ कर दिया गया था।
सीएस स्तर पर रुकी प्रक्रिया
नियमों के अनुसार DPC में अधिकारियों के पिछले 5 वर्षों के मूल सीआर फोल्डर की हर प्रविष्टि का मिलान किया जाना अनिवार्य होता है। जब यह पूरा मामला तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन के संज्ञान में आया, तो उन्होंने मौके पर ही फाइलें वापस लौटाते हुए गहन परीक्षण के निर्देश दिए। गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद DPC की बैठक को रद्द कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया के अटकने से 23 पदों पर होने वाले प्रमोशन का इंतजार कर रहे योग्य अधिकारियों को तगड़ा झटका लगा है।




