एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में विकास प्रोजेक्ट्स को रफ्तार देने की नई पहल: प्रशासन अपनाएगा ‘भूमि पूलिंग का 50-50 फॉर्मूला’; भू-स्वामियों को मिलेगी विकसित जमीन
भोपाल: जिले में भूमि अधिग्रहण की जटिल प्रक्रियाओं और भू-स्वामियों की सहमति न मिलने के कारण अटके विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स को अब गति मिलने की उम्मीद है। जिला प्रशासन ने इसके लिए ‘भूमि पूलिंग के 50-50 फॉर्मूले’ पर काम करना शुरू कर दिया है। इस नए प्रस्ताव के तहत, जिस भू-स्वामी की जमीन बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए ली जाएगी, उसे केवल एकमुश्त मुआवजा देने के बजाय प्रोजेक्ट एजेंसी द्वारा विकसित भूमि का एक हिस्सा वापस किया जाएगा, जिससे भू-स्वामी खुद उसका उपयोग कर सके या बेचकर बेहतर आर्थिक लाभ कमा सके।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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50-50 फॉर्मूले का उद्देश्य: भूमि अधिग्रहण के विरोध और मुआवजे से जुड़े पुराने विवादों को कम करने के लिए प्रशासन अब ‘जमीन के बदले विकसित जमीन’ देने के विकल्प पर विचार कर रहा है।
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भू-स्वामी बनेंगे डेवलपर: प्रोजेक्ट के आसपास या उसी क्षेत्र में एजेंसी द्वारा विकसित की गई आवासीय या व्यावसायिक भूमि का हिस्सा वापस मिलने पर मालिक खुद डेवलपर की तरह उसका लाभ उठा सकेंगे।
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मौजूदा नियम: वर्तमान में निजी भूमि अधिग्रहण के लिए शासन के नियमों के तहत मुआवजा या टीडीआर-टीओडी (TDR-TOD) सर्टिफिकेट देने का प्रावधान है, जिसके साथ अब भूमि पूलिंग को भी विकल्प बनाया जा रहा है।
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कलेक्टर का बयान: भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुसार, जिले में चल रहे और नए प्रोजेक्ट्स के लिए जमीनों की आवश्यकता है और सभी नियमों का पालन करते हुए अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराई जा रही है।
किन प्रमुख प्रोजेक्ट्स में आ रही है जमीन की चुनौती?
प्रशासन की इस नई पहल से भोपाल और आसपास के उन तमाम महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जहां भूमि जुटाना एक बड़ी बाधा बना हुआ है:
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अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स: ग्राम बरखेड़ा नाथू (तहसील हुजूर) में विस्तार के लिए निजी भूमि अधिग्रहण।
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मेट्रो ऑरेंज लाइन: नजूल शहर वृत्त के अंतर्गत निजी जमीन की आवश्यकता।
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पश्चिमी बायपास: हुजूर और कोलार तहसील के कई गांवों में भूमि अधिग्रहण का दायरा।
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औद्योगिक क्षेत्र पीपलनेर: बैरागढ़कलां में 24 मीटर चौड़े मार्ग के निर्माण हेतु जमीन की जरूरत।
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आरओबी निर्माण: सूखी सेवनिया रेलवे ओवरब्रिज (चोपड़ाकला) और बावड़ियाकला चौराहा से आशिमा माल आरओबी के लिए जमीन की प्रक्रिया।
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टेम मध्यम सिंचाई परियोजना: ग्राम मजीदगढ़ (बैरसिया) में डूब क्षेत्र से प्रभावित जमीन की आवश्यकता।
इस नीति के पूरी तरह स्पष्ट होने और शासन स्तर पर नियम तय होने के बाद विकास कार्यों में तेजी आने और भू-स्वामियों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।




