एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
संवेदनशीलता और इंसानियत की अनूठी मिसाल: 14 वर्षीय रेहान के हत्यारे पुलिस की गिरफ्त में, एसीपी संतोष पटेल ने पूरा किया बेटे का अधूरा सपना
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से मानवता और पुलिसिंग का एक ऐसा मानवीय चेहरा सामने आया है, जो किसी की भी आंखें नम कर दे। करीब एक सप्ताह पहले हुई 14 वर्षीय रेहान की सनसनीखेज हत्या के मामले में पुलिस ने जहां एक ओर त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्यारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, वहीं दूसरी ओर जांच अधिकारी ने दिवंगत बच्चे की गरीब मां के एक अधूरे सपने को अपने निजी खर्च पर पूरा कर समाज के सामने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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गरीबी के बीच मां के लिए था एक सपना: करीब दस साल पहले पिता का साया उठ जाने के बाद 14 वर्षीय रेहान ही अपनी मां रानी शाह का इकलौता सहारा था। इकबाल मैदान के पास की-रिंग और पेन बेचकर वह अपने परिवार का पेट पालता था। इस छोटी सी उम्र में भी उसका एक बड़ा सपना था—खूब मेहनत करके पैसे बचाना और अपनी मां के लिए ‘बत्तीसी’ (कृत्रिम दांत) बनवाना, ताकि उनकी मां बिना किसी तकलीफ के भोजन कर सकें।
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क्रूर हत्या और पुलिस की त्वरित कार्रवाई: कुछ दिन पहले अंडकोष पर गंभीर चोट पहुंचाने के कारण रेहान की हत्या का मामला सामने आया था, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। कोतवाली एसीपी संतोष पटेल ने इस संवेदनशील मामले की खुद कमान संभाली और महज एक सप्ताह के भीतर गहन छानबीन कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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भोजन के दौरान सामने आई मां की पीड़ा: कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने रानी शाह के खानपान पर ध्यान दिया और उन्हें वेज बिरयानी मंगवाकर दी, तो वे उसे ठीक से चबा नहीं पा रही थीं। पूछने पर उन्होंने नम आंखों से पुलिस को अपने बेटे रेहान का वह अधूरा सपना बताया, जो वह अपनी मां के लिए देखना चाहता था।
पुलिस ने उठाया खर्च, दंत चिकित्सक ने शुरू किया इलाज
एक मां की इस गहरी पीड़ा और मृत बच्चे के जज्बे को समझते हुए एसीपी संतोष पटेल ने यह तय किया कि रेहान जो अपनी मां के लिए नहीं कर सका, उसे पुलिस अपने स्तर पर पूरा करेगी। उन्होंने तुरंत दंत चिकित्सक डॉ. अतीक अहमद से संपर्क किया। डॉक्टर और उनकी टीम ने रानी शाह के मुंह की जांच की और अब पुलिस के सहयोग से उनकी बत्तीसी बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
भले ही अपराधी रेहान की जिंदगी छीन ले गए, लेकिन पुलिस की इस मानवीय पहल ने यह साबित कर दिया है कि खाकी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील इंसान भी धड़कता है, जिसने एक मां के चेहरे पर मुस्कान लौटाने की अनूठी कोशिश की है।




