एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल पुलिस की बड़ी पहल: साइबर ठगी के पीड़ितों को राहत और होल्ड खातों से पाबंदी हटाने के लिए एमआरएम-जीआरएम पोर्टल की निगरानी मजबूत
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों और पीड़ितों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए भोपाल पुलिस ने एक बेहद राहत भरा कदम उठाया है। साइबर ठगी के मामलों में पीड़ितों की फंसी हुई राशि समय पर वापस दिलाने और बिना किसी संलिप्तता के बैंक खातों पर लगे अनावश्यक ‘होल्ड’ को हटवाने के लिए एमआरएम (MRM) और जीआरएम (GRM) पोर्टल की निगरानी व्यवस्था को काफी मजबूत कर दिया गया है।
अब शहर के चारों जोन्स के लिए साइबर सेल के सब-इंस्पेक्टरों (SI) को विशेष प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो इन पोर्टलों के जरिए लंबित मामलों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करेंगे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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चारों जोन के लिए नियुक्त हुए प्रभारी: राजधानी के चारों पुलिस जोन्स में मामलों की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग के लिए साइबर सेल के एसआई स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये प्रभारी पेंडिंग मामलों की समीक्षा कर संबंधित थानों की विवेचना में सहयोग करेंगे।
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7 दिन के भीतर राशि वापसी की प्रक्रिया: एमआरएम (Mass Refund Mechanism) पोर्टल के जरिए 50,000 रुपये तक की साइबर ठगी की होल्ड राशि को सत्यापित कर पीड़ित के खाते में वापस भेजने की प्रक्रिया को अब और तेज किया जाएगा। प्रभारियों की जवाबदेही तय होने से पात्र मामलों में 7 दिन के भीतर राशि रिफंड कराने का लक्ष्य रखा गया है।
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अनावश्यक होल्ड खातों से राहत (GRM): कई मामलों में खाताधारक का साइबर अपराध से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं होता, फिर भी ठगी की रकम पहुंचने के कारण उनका बैंक खाता लंबे समय तक होल्ड रहता है। ऐसे मामलों की जांच के लिए जीआरएम (Grievance Redressal Mechanism) पोर्टल का उपयोग किया जाता है। संलिप्तता न मिलने पर बैंक खातों से होल्ड हटाने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।
प्रक्रिया: कैसे काम करते हैं ये दोनों पोर्टल?
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एमआरएम (MRM) – ठगी की रकम वापस पाने के लिए:
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साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930, राष्ट्रीय साइबर पोर्टल या थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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पुलिस जांच में यदि ठगी की रकम किसी खाते में होल्ड मिलती है, तो एमआरएम के तहत केस दर्ज किया जाता है।
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50,000 रुपये तक की राशि के लिए आवश्यक दस्तावेज और बैंक विवरण सत्यापित किए जाते हैं।
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पोर्टल पर औपचारिकताएं पूरी होने के बाद होल्ड राशि सीधे पीड़ित के बैंक खाते में वापस भेज दी जाती है।
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जीआरएम (GRM) – बैंक खाते से होल्ड हटवाने के लिए:
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यदि आपके बैंक खाते पर साइबर ठगी के कारण रोक लग गई है, तो संबंधित थाने या साइबर सेल में संपर्क करें।
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खाताधारक को अपना आवेदन और जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
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पुलिस ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री और मामले में खाताधारक की संलिप्तता की गहन जांच करती है।
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यदि कोई संलिप्तता नहीं पाई जाती है, तो जीआरएम पोर्टल के माध्यम से बैंक को रिपोर्ट भेजी जाती है, जिसके आधार पर बैंक खाते से होल्ड हटा देता है।
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साइबर ठगी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दौर
यह व्यवस्था ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो गई है जब हाल ही में मध्य प्रदेश (जैसे देवास आदि जिलों) में डिजिटल अरेस्ट और बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क के खिलाफ पुलिस ने राज्यों में दबिश देकर बड़ी गिरफ्तारियां की हैं। भोपाल पुलिस के इस कदम से आम नागरिकों को तकनीकी उलझनों और बैंक खातों के चक्कर काटने से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।




