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छत्तीसगढ़ में MP के बाघों ने बढ़ाया कुनबा, 2010 में सिर्फ एक था, अब 10 पार

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

मध्य प्रदेश के बाघों ने बढ़ाई छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व की रौनक: प्राकृतिक कॉरिडोर से पहुंचा कुनबा, बाघों की संख्या हुई 10 के पार

भोपाल/अचानकमार: कभी बाघ विहीन होने की कगार पर पहुंच चुके छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) में मध्य प्रदेश के जंगलों से पहुंचे बाघों ने नई जान फूंक दी है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच मौजूद प्राकृतिक रास्तों (नेचुरल कॉरिडोर) के जरिए कान्हा, बांधवगढ़ और पेंच टाइगर रिजर्व से बाघ खुद-ब-खुद अचानकमार पहुंच रहे हैं और वहां अपनी आबादी तेजी से बढ़ा रहे हैं। इस प्राकृतिक प्रवास के चलते छत्तीसगढ़ शासन ने अब मध्य प्रदेश से आधिकारिक रूप से बाघ मांगने के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • बाघों की संख्या बढ़कर हुई 10 के पार: एक समय (वर्ष 2010 में) ऐसा था जब अचानकमार में सिर्फ एक ही बाघ बचा था। इसके बाद 2014 में इनकी संख्या 3 और 2018 में 5 दर्ज की गई थी। अब मध्य प्रदेश के बाघों के आने और यहां प्रजनन होने से अचानकमार में बाघों की कुल संख्या बढ़कर 10 के पार पहुंच गई है।

  • बांधवगढ़ की ‘झुमरी’ बनी बड़ा आकर्षण: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से करीब 400 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके अचानकमार पहुंची बाघिन ‘झुमरी’ ने हाल ही में 4 नए शावकों को जन्म दिया है। वह अब तक वहां तीन बार में कुल 7 शावकों को जन्म दे चुकी है।

  • अन्य बाघों का प्रवास: वर्ष 2023 में कान्हा टाइगर रिजर्व से बाघ ‘टी-200’ और पेंच से बाघिन ‘गंगा’ भी इसी प्राकृतिक कॉरिडोर के रास्ते अचानकमार पहुंचे हैं। इसके अलावा, मध्य प्रदेश से घायल अवस्था में रेस्क्यू कर लाई गई एक अन्य बाघिन को ठीक होने के बाद ‘आशा’ नाम दिया गया है।

राज्य में भी बढ़ा बाघों का कुनबा

छत्तीसगढ़ राज्य वन्यजीव बोर्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरे राज्य में भी बाघों की संख्या में उत्साहजनक इजाफा हुआ है। वर्ष 2022 में जहां पूरे राज्य में कुल 17 बाघ दर्ज किए गए थे, वहीं अप्रैल 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 35 हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘जीन पूल एक्सचेंज’ और बाघों की संख्या को स्थाई बनाए रखने के लिए इन प्राकृतिक कॉरिडोर का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। इंसानी बस्तियों और विकास कार्यों के बीच से गुजरने वाले इन रास्तों में आने वाली रुकावटें वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकती हैं, इसलिए जंगलों के उचित प्रबंधन और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

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