एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
‘समृद्ध मध्य प्रदेश @ 2047’ कॉन्क्लेव: केंद्रीय संस्थानों ने तैयार किया विकास का खाका, IIT इंदौर 10 हजार युवाओं को देगा विशेष प्रशिक्षण
भोपाल: मध्य प्रदेश को वर्ष 2047 तक एक विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के विजन को लेकर राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ‘समृद्ध मध्य प्रदेश @ 2047: केंद्रीय संस्थानों की भूमिका’ विषय पर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस महा-सम्मेलन में राज्य के दीर्घकालीन विकास के लिए देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय एवं शैक्षणिक संस्थानों, राज्य सरकार, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों के बीच मजबूत साझेदारी और रोडमैप पर सहमति बनी है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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IIT इंदौर का बड़ा कदम: कॉन्क्लेव के दौरान आईआईटी इंदौर ने राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराने की घोषणा की है। साथ ही, संस्थान आगामी चार-पांच वर्षों में 10,000 युवाओं को विशेषीकृत क्षेत्रों में प्रशिक्षित करेगा।
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IISER और IIM का सहयोग: आईआईएसईआर (IISER) भोपाल ने ड्रोन तकनीक, खनन और कृषि अनुसंधान में सहयोग देने की बात कही, जबकि आईआईएम (IIM) इंदौर ने कृषि सुधार, पर्यटन और पंचायती राज के डिजिटलीकरण में अपनी सक्रिय भागीदारी का प्रस्ताव रखा।
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साइबर सुरक्षा और ऊर्जा संक्रमण: आईआईआईटी (IIIT) भोपाल ने राज्य को अपनी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, वहीं मैनिट (MANIT) भोपाल ने ऊर्जा संक्रमण, कौशल विकास और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चल रही पहलों की जानकारी साझा की।
विभिन्न संस्थानों की प्रमुख प्रतिबद्धताएं
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LNIPE ग्वालियर: खेल, विज्ञान, तकनीक और उद्यमिता को आपस में जोड़ने तथा जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तराशने की प्रतिबद्धता जताई।
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CSIR-AMPRI भोपाल: कौशल विकास, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals), पर्यावरणीय तकनीकों और ‘स्मार्ट विलेज’ पहल पर जोर दिया।
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SPA भोपाल और NID: एसपीए भोपाल ने शहरी नियोजन, आवास, परिवहन, पर्यावरण और विरासत संरक्षण में तकनीकी सहयोग की बात कही, जबकि एनआईडी (NID) मध्य प्रदेश ने राज्य के लिए मानव-केंद्रित ‘डिजाइन इंजन’ की भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
भविष्य की कार्ययोजना
इस कॉन्क्लेव के माध्यम से नीतिगत समन्वय, डिजिटल नॉलेज रिपॉजिटरी और विशेषज्ञ डेटाबेस तैयार करने पर जोर दिया गया। साथ ही, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और केंद्रीय संस्थानों के बीच निरंतर और प्रभावी सहयोग विकसित करने पर सहमति बनी है, जिससे मध्य प्रदेश के चहुंमुखी विकास को गति मिल सके।




