एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
आदिवासी सीटों पर बीजेपी का ‘मिशन मजबूत संगठन’: मुख्यमंत्री मोहन यादव की बैठक में बनी रणनीति, हर तीन महीने होगी जनजातीय प्रतिनिधियों संग चर्चा
भोपाल: मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आगामी राजनीतिक रणनीतियों के तहत उन आदिवासी बहुल सीटों पर अपना फोकस बढ़ा दिया है, जहां पार्टी का जनाधार अपेक्षाकृत कमजोर रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर करीब चार घंटे तक चले उच्चस्तरीय मंथन में संगठन और सरकार के बीच इसको लेकर ठोस रूपरेखा तैयार की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ निर्देश दिए हैं कि कमजोर आदिवासी सीटों पर अभी से सक्रिय होकर युवाओं के साथ संवाद और संपर्क को और मजबूत किया जाए।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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हर तीन महीने होगी बैठक: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि अब प्रत्येक तीन महीने में जनजातीय जनप्रतिनिधियों के साथ विशेष बैठक आयोजित की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय समस्याओं के त्वरित समाधान और योजनाओं की मॉनिटरिंग में मदद मिल सके।
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जनजातीय जनप्रतिनिधियों ने रखी समस्याएं: मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके, निर्मला भूरिया, नागर सिंह चौहान और विजय शाह के अलावा जनजातीय वर्ग के कई विधायक, सांसद और भाजपा एसटी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज टेकाम उपस्थित रहे। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी समस्याएं और विकासखंडों में जर्जर स्कूल-हॉस्टल भवनों का मुद्दा मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से रखा।
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युवाओं से संवाद पर जोर: पार्टी ने कमजोर आदिवासी सीटों पर पकड़ मजबूत करने के लिए आदिवासी युवाओं के बीच सीधे तौर पर पैठ बनाने और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की रणनीति बनाई है।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में मोर्चों की बैठक आज
संगठन स्तर पर गतिविधियों को और तेज करने के लिए मंगलवार को भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी के विभिन्न मोर्चों की एक अहम बैठक बुलाई गई है।
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कार्ययोजना पर चर्चा: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें अनुसूचित जनजाति (ST), अनुसूचित जाति (SC) सहित अन्य मोर्चों के पदाधिकारी और संभाग-जिला स्तर के कार्यकर्ता शामिल होंगे।
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शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी: इस महत्वपूर्ण बैठक में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के भी शामिल होने की संभावना है, जहां आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और मोर्चों की कार्ययोजना को लेकर अंतिम रूपरेखा तैयार की जाएगी।




