एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल बड़े तालाब अतिक्रमण मामला: एमपी हाईकोर्ट ने कहा— ‘यह जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय’, एनजीटी से जल्द सुनवाई का आग्रह
जबलपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने राजधानी भोपाल के बड़े तालाब के किनारे चल रही बेदखली और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के मामले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा है कि यह मामला सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के समक्ष जाने की छूट दी है और एनजीटी से आग्रह किया है कि आवेदन पेश होते ही इस पर शीघ्र सुनवाई की जाए।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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याचिकाकर्ताओं का पक्ष: भोपाल के भदभदा चौराहा स्थित प्रेमपुरा निवासी निसार खान, मोहसिन और एजाज खान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वे अपनी पैतृक संपत्ति पर लंबे समय से रह रहे हैं और उनके मकान बड़े तालाब से निर्धारित 50 मीटर की प्रतिबंधित सीमा से बाहर हैं। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने गूगल मैप (Google Map) का हवाला देते हुए कहा कि उनकी संपत्ति दायरे में नहीं आती।
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बिना पक्ष सुने कार्रवाई का आरोप: याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता मुकेश कुमार अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल एनजीटी के समक्ष चल रही मूल कार्यवाही में पक्षकार नहीं थे, इसके बावजूद उन्हें प्रशासन द्वारा बेदखली का नोटिस थमा दिया गया और उनका पक्ष सुने बिना कार्रवाई की जा रही है।
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एनजीटी के निर्देश: उल्लेखनीय है कि एनजीटी ने इससे पहले बड़े तालाब के पास से 117 अतिक्रमण हटाकर 31 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट का निर्देश और संवेदनशीलता
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनीन्द्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में उनकी बात सुनना बेहद जरूरी है।
हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना याचिकाकर्ताओं को एनजीटी के समक्ष तुरंत आवेदन प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी। साथ ही, एनजीटी के न्यायिक व प्रशासनिक सदस्यों से विशेष आग्रह किया है कि आवेदन दाखिल होते ही इस पर जल्द से जल्द सुनवाई की जाए ताकि किसी भी तरह की एकतरफा या अनुचित कार्रवाई से बचा जा सके।




