एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
नर्मदा संरक्षण की नई पहल: ‘विधायक आदर्श घाट योजना’ लाने की तैयारी, विधायक निधि से संवारे जाएंगे 16 जिलों के घाट; जुड़ेंगे योग और ध्यान केंद्र
भोपाल: मध्य प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली मां नर्मदा के घाटों को स्वच्छ, सुंदर और सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार अब एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही ‘विधायक आदर्श घाट योजना’ लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत नर्मदा नदी से लगे 16 जिलों के घाटों के विकास, संरक्षण और जीर्णोद्धार की जिम्मेदारी सीधे तौर पर क्षेत्र के विधायकों को सौंपी जाएगी। इसके लिए विधायक निधि (MLA Fund) का उपयोग किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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16 जिलों के विधायकों को जिम्मेदारी: अनूपपुर से लेकर आलीराजपुर तक, नर्मदा नदी के तट से जुड़े कुल 16 जिलों (अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, नर्मदापुरम, हरदा, सीहोर, देवास, खंडवा, खरगोन, धार, बड़वानी और आलीराजपुर) में विधानसभा क्षेत्रवार विधायकों को घाटों का जिम्मा दिया जाएगा। प्रत्येक जिले में एक ‘मॉडल घाट’ की स्थापना की जाएगी।
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घाटों की मौजूदा चुनौतियां: एक सर्वे के अनुसार, नर्मदा के करीब 80% घाटों पर शौचालय (विशेषकर महिलाओं के लिए) नहीं हैं। 76% घाटों पर कचरा प्रबंधन प्रणाली का अभाव है, और 807 घाटों पर सुरक्षा संकेतक व अवरोधक नहीं होने से तीर्थयात्रियों की सुरक्षा पर खतरा बना रहता है। इसके अलावा 66% घाटों के पास रासायनिक खेती के कारण जल प्रदूषण का गंभीर संकट है।
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नर्मदा का भौगोलिक महत्व: अमरकंटक (अनूपपुर) से उद्गम होने वाली 1,312 किमी लंबी नर्मदा नदी का 87% प्रवाह क्षेत्र मध्य प्रदेश में, 11% गुजरात में और 2% महाराष्ट्र में आता है। इस योजना के दायरे में कुल 27 जिलों के शहरी (54) और ग्रामीण (818) क्षेत्र शामिल किए गए हैं।
योजना की मुख्य विशेषताएं और सुविधाएं
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योग और ध्यान केंद्र: नियमित धार्मिक पर्यटकों के साथ-साथ ‘वेलनेस और योग टूरिज्म’ को बढ़ावा देने के लिए घाटों के पास विशेष रूप से ध्यान केंद्र, योग सेंटर और पार्कों का निर्माण किया जाएगा।
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जैविक खेती को बढ़ावा: घाटों के आसपास रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को हतोत्साहित करने और जैविक कृषि (Organic Farming) को अपनाने के लिए किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
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प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध: घाटों की पवित्रता और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक तथा अन्य हानिकारक सामग्रियों के उपयोग पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। साथ ही रात के समय सुरक्षा और रोशनी के लिए पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।




