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35-37 साल की सेवा के बाद भी पदोन्नति का इंतजार, बिजली बोर्ड के इंजीनियरों का फूटा गुस्सा, चालू प्रभार की मांग

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

मप्र विद्युत मंडल के अभियंताओं में असंतोष: 35-37 साल की लंबी सेवा के बाद भी प्रमोशन का इंतजार, कार्यपालन यंत्री का चालू प्रभार देने की मांग

भोपाल: मध्य प्रदेश में बिजली कंपनियों के अभियंताओं का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। मध्यप्रदेश विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने मंडल संवर्ग के वरिष्ठ और पात्र सहायक अभियंताओं को कार्यपालन यंत्री (EE) का चालू प्रभार दिए जाने की जोरदार मांग उठाई है। इस संबंध में संघ ने मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी के प्रबंध संचालक को एक औपचारिक अभ्यावेदन सौंपकर 9 जून 2011 के मंत्रिपरिषद के निर्णय और परिपत्र के प्रावधानों का सख्ती से पालन कराने का आग्रह किया है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • मंडल संवर्ग के लिए आरक्षित हैं 115 पद: संघ के अनुसार, वर्ष 2011 के मंत्रिपरिषद के निर्णय के तहत मंडल संवर्ग के लिए कार्यपालन यंत्री के 115 पद आरक्षित किए गए हैं। इनमें से वर्तमान में केवल 21 अधिकारी नियमित रूप से पदोन्नत हैं, जबकि 7 अधिकारी चालू प्रभार पर कार्य कर रहे हैं।

  • हक मारे जाने का आरोप: संघ का मुख्य आरोप है कि आरक्षित कोटे के बचे हुए पदों पर कंपनी संवर्ग के अधिकारियों को अवसर दिया जा रहा है, जिससे मंडल संवर्ग के अधिकारियों के लिए तय पदों का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

  • 37 साल की सेवा और मात्र एक प्रमोशन: अभ्यावेदन में यह भी रेखांकित किया गया है कि मंडल संवर्ग के कई अभियंता वर्ष 1989 से कनिष्ठ यंत्री के पद पर सेवा दे रहे हैं और अपनी सेवा के 35 से 37 वर्ष पूरे कर चुके हैं। इसके बावजूद इनमें से कई अधिकारियों को अपने पूरे करियर में केवल एक ही नियमित पदोन्नति मिल पाई है।

संघ की प्रमुख मांग

अभियंता संघ ने प्रबंधन से मांग की है कि नियमों और प्रावधानों का हवाला देते हुए आरक्षित रिक्त पदों पर वरिष्ठता, अनुभव और पात्रता के आधार पर तत्काल मंडल संवर्ग के सहायक अभियंताओं को कार्यपालन यंत्री का चालू प्रभार प्रदान किया जाए, ताकि लंबे समय से पदोन्नति की आस लगाए बैठे वरिष्ठ अभियंताओं को उनका हक मिल सके।

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