एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का दिल्ली में शक्ति प्रदर्शन: मध्य प्रदेश के 5 हजार शिक्षकों ने जाट धर्मशाला में हुंकार भरी, कानून हटाने की मांग
भोपाल / नई दिल्ली: शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग को लेकर देश भर के शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश से करीब 5,000 शिक्षक दिल्ली पहुंचे और केंद्र सरकार से इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से खत्म करने की मांग की। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के कारण रविवार को दिल्ली के केशवपुरम स्थित जाट धर्मशाला में एक विशाल राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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जाट धर्मशाला में राष्ट्रीय अधिवेशन: ‘ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट इंडिया’ के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से हजारों शिक्षक शामिल हुए, जिसमें मध्य प्रदेश के शिक्षकों ने भी बड़ी संख्या में शिरकत की।
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अनुभवी शिक्षकों का अपमान: मध्य प्रदेश के शिक्षक एवं फ्रंट के मुख्य राष्ट्रीय संयोजक जगदीश यादव ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वर्षों से निष्ठापूर्वक शिक्षण कार्य कर रहे अनुभवी शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता थोपना उनके लंबे सेवाकाल और मान-सम्मान का अपमान है।
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संसद में विधेयक लाने की मांग: शिक्षकों ने मांग की है कि सरकार संसद में विशेष विधेयक लाकर इस नियम को समाप्त करे। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो जिला, प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर पर और उग्र आंदोलन किया जाएगा।
क्या है पूरा विवाद?
शिक्षा के क्षेत्र में नए नियमों के तहत सेवारत और अनुभवी शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता जोड़ी गई है, जिसका देश भर के शिक्षक संगठन पुरजोर विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का तर्क है कि जो शिक्षक पहले से ही शिक्षण कार्यों का लंबा अनुभव रखते हैं, उन पर इस तरह की नई योग्यता शर्तें थोपना अनुचित है।




