एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एमपी में ई-अटेंडेंस 3.0 के खिलाफ महासंग्राम: 3.75 लाख शिक्षक लामबंद; डेटा सुरक्षा, थर्ड पार्टी डोमेन और 17,817 लंबित शिकायतों पर सरकार से सवाल
भोपाल: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा लागू की जा रही नई ई-अटेंडेंस 3.0 व्यवस्था अब एक बड़े विवाद में घिरती नजर आ रही है। इस प्रणाली के विरोध में प्रदेशभर के करीब 3.75 लाख शिक्षक सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों का विरोध मुख्य रूप से उपस्थिति के लिए भरवाए जा रहे ऑनलाइन सहमति पत्र, निजी डेटा की सुरक्षा, थर्ड पार्टी डोमेन के इस्तेमाल और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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साढ़े तीन लाख से अधिक शिक्षक लामबंद: इस व्यवस्था के दायरे में प्रदेश के लगभग 3.75 लाख शिक्षक आ रहे हैं, जिनमें 2.32 लाख नियमित शिक्षक, 72 हजार अतिथि शिक्षक और करीब 70 हजार ट्राइबल विभाग के शिक्षक शामिल हैं। सहमति पत्र मांगे जाने के बाद से विरोध की आग और भड़क उठी है।
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डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी पर गंभीर सवाल: शिक्षकों को डर है कि इस प्रक्रिया से उनका निजी डेटा चोरी हो सकता है। शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने सवाल उठाया है कि क्या ई-अटेंडेंस 3.0 का पोर्टल सुरक्षित ‘gov.in’ या ‘nic.in’ डोमेन पर है या किसी थर्ड पार्टी डोमेन का उपयोग हो रहा है?
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सर्वर और फिड्यूशरी की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग: शिक्षकों की मांग है कि साइबर सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट और भारत सरकार की वेबसाइट गाइडलाइंस (GIGW) को पारदर्शी रखा जाए। उनका तर्क है कि इसके जरिए शिक्षकों की लाइव लोकेशन, मोबाइल नंबर और सर्विस रिकॉर्ड जैसी संवेदनशील जानकारियां दर्ज हो रही हैं, इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि डेटा का संरक्षक (Fiduciary) कौन है।
शिकायतों के निपटारे में सुस्ती पर भी नाराजगी
ई-अटेंडेंस को लेकर दिखाई जा रही प्रशासनिक जल्दबाजी पर शिक्षकों का गुस्सा इसलिए भी फूट रहा है क्योंकि उनकी पुरानी और गंभीर समस्याएं लंबे समय से लंबित पड़ी हैं।
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परिवेदना पोर्टल पर अटकीं 17,817 शिकायतें: शिक्षकों की सेवा संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए बनाए गए ‘परिवेदना पोर्टल’ पर कुल 36,827 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिनमें से 19 हजार का ही निपटारा हो पाया है, जबकि लगभग 17,817 मामले आज भी धूल फांक रहे हैं।
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सबसे ज्यादा मामले मुरैना और भोपाल में: संगठन का आरोप है कि जो मामले सामान्य प्रशासनिक स्क्रूटनी से आसानी से सुलझ सकते हैं, वे महीनों और सालों से पेंडिंग हैं। इनमें सबसे अधिक मामले मुरैना जिले के हैं, जबकि राजधानी भोपाल में भी 1,824 शिकायतें लंबित चल रही हैं।




