एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एनजीटी के निर्देश पर भोपाल बड़े तालाब का ड्रोन और ग्राउंड सर्वे शुरू: शुरुआती जांच में सामने आया रिकॉर्ड से अधिक दायरा, कई एफटीएल मुनारें गायब
भोपाल: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों के बाद भोपाल के ऐतिहासिक बड़े तालाब के संरक्षण और अतिक्रमण की सच्चाई सामने लाने के लिए सघन सर्वे की शुरुआत हो चुकी है। रविवार को गौहर महल क्षेत्र से इसकी शुरुआत करते हुए दो विशेष टीमों ने ड्रोन और ग्राउंड ट्रुथिंग के जरिए तालाब के वास्तविक दायरे की माप की। शुरुआती जांच में ही यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि तालाब का वास्तविक जल दायरा सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज सीमा से काफी अधिक है, और कई महत्वपूर्ण स्थानों से एफटीएल (Full Tank Level) के सीमा चिह्न (मुनारें) पूरी तरह गायब मिलें हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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ड्रोन और ग्राउंड सर्वे: एनजीटी के आदेश पर गठित इस संयुक्त टीम में सर्वे विशेषज्ञ सुभाष सी. पांडे, याचिकाकर्ता राशिद नूर खान के साथ-साथ नगर निगम, जिला प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) के अधिकारी शामिल हैं। रविवार को गौहर महल, खानूगांव, कोहेफिजा और हलालपुरा क्षेत्र का सर्वे किया गया।
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गायब मिले सीमा चिह्न (मुनारें): खानूगांव क्षेत्र में जहां एफटीएल की कई मुनारें होनी चाहिए थीं, वहां बमुश्किल सिर्फ एक मुनार मिली। इसके अलावा हलालपुरा के पीछे फिजा फार्म, लैंडमार्क मैरिज गार्डन और चिरायु अस्पताल के आसपास एफटीएल दायरे में निर्माण कार्य और भारी भराव देखा गया, जहां से सीमा चिह्न पूरी तरह गायब मिले।
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रिटेनिंग वॉल के ऊपर पहुंचा पानी: सर्वे के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि कई स्थानों पर जलभराव तय सीमा और रिटेनिंग वॉल को पार कर चुका है। हलालपुरा में पक्के पुल के आगे तक तालाब का पानी पहुंच गया है, जबकि कई हिस्सों में जलकुंभी और जलीय घास का भारी फैलाव नजर आया।
आगे की कार्रवाई
रविवार को एक छोर की जांच पूरी होने के बाद, अब सोमवार को बैरागढ़, रातीबड़ और बिशनखेड़ी जैसे अहम इलाकों में सर्वे की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। ड्रोन सर्वे के दौरान एयरपोर्ट के पास एक छोटा ड्रोन तकनीकी कारणों से गिर भी गया, जिसके बाद अन्य वैकल्पिक उपकरणों से सर्वे जारी रखा गया। इन सभी तकनीकी और जमीनी आंकड़ों का मिलान कागजी रिकॉर्ड और ग्रीन बेल्ट के मानकों के साथ किया जाएगा, जिससे बड़े तालाब पर हुए अतिक्रमण की पूरी रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष पेश की जा सके।




