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पांच दिन काम की मांग पर बैंककर्मियों की देशव्यापी हड़ताल, मैदान में उतरेंगे 8 लाख अधिकारी-कर्मचारी

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

बैंककर्मियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल: पांच दिवसीय कार्यसप्ताह और पीएलआई योजना के विरोध में उतरे 8 लाख कर्मचारी, भोपाल में निकली विशाल रैली

भोपाल: यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर के लगभग 8 लाख बैंक अधिकारी और कर्मचारी आज (11 सितंबर 2026) राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं। बैंक कर्मचारियों की यह हड़ताल मुख्य रूप से लंबे समय से लंबित ‘पांच दिवसीय बैंक सप्ताह’ (Five Day Work Week) को लागू करने की मांग और सरकार की पीएलआई (PLI) योजना के विरोध में बुलाई गई है। इस देशव्यापी प्रदर्शन में यूएफबीयू से जुड़े सात प्रमुख बैंक संगठन (जैसे AIBEA, AIBOC, NCBE, आदि) पूरी ताकत के साथ शामिल हुए हैं, जिसके चलते आज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • प्रमुख मांगें और विरोध: बैंक यूनियंस की मुख्य मांग है कि सरकार बैंकिंग सेक्टर में पांच दिवसीय कार्यसप्ताह लागू करने के अपने पुराने वादे को जल्द पूरा करे। इसके साथ ही, कर्मचारी सरकार की पीएलआई (PLI) योजना का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे तुरंत वापस लेने या द्विपक्षीय चर्चा के जरिए इसमें सुधार करने की मांग पर अड़े हैं।

  • भोपाल में बड़ा शक्ति प्रदर्शन: राजधानी भोपाल में बैंककर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के को-ऑर्डिनेटर वीके शर्मा के नेतृत्व में सुबह 10 बजे महाराणा प्रताप नगर (जोन-1) स्थित पंजाब नेशनल बैंक (इंदिरा प्रेस कॉम्प्लेक्स शाखा) के सामने भारी संख्या में बैंक अधिकारी और कर्मचारी एकत्रित हुए।

  • अनुशासित रैली: प्रदर्शन को पूरी तरह अनुशासित रखते हुए सभी बैंककर्मी अपने बैनर, झंडों और तख्तियों के साथ दो-दो की कतार में रैली निकालते हुए सड़कों पर उतरे और सरकार विरोधी नारे लगाए।

बैंकिंग सेवाओं पर असर

हड़ताल के कारण आज भोपाल सहित पूरे देश में चेक क्लीयरेंस, लोन प्रोसेसिंग और नकदी जमा-निकासी जैसे कई बैंकिंग कार्य प्रभावित हुए हैं। हालांकि, एटीएम और डिजिटल नेटबैंकिंग सेवाएं सुचारू रूप से चालू हैं, लेकिन बैंक शाखाओं में पहुंचने वाले ग्राहकों को सामान्य कामकाज के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा है। यूनियंस ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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