एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में अब बायोमेट्रिक अटेंडेंस होगी अनिवार्य: ‘साइन-एंड-वैनिश’ कल्चर पर लगेगी रोक, मंत्रालय से होगी शुरुआत
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी कार्यालयों में लेटलतीफी और समय पर दफ्तर न पहुंचने वाले कर्मचारियों पर अब प्रशासन का शिकंजा कसने वाला है। राज्य सरकार ने कागजी (मैनुअल) हाजिरी रजिस्टर की व्यवस्था को समाप्त कर उसकी जगह आधुनिक ‘बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम’ लागू करने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों की समय की पाबंदी सुनिश्चित करना और ‘हाजिरी लगाओ और गायब हो जाओ’ (साइन-एंड-वैनिश) कल्चर को पूरी तरह खत्म करना है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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प्रमुख कार्यालयों से होगी शुरुआत: इस डिजिटल अटेंडेंस प्रणाली की शुरुआत राजधानी भोपाल के राज्य सचिवालय (मंत्रालय) और उससे जुड़े प्रमुख भवनों—सतपुड़ा तथा विंध्याचल भवन से की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे प्रदेश के अन्य सभी सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य किया जाएगा।
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साल में काम के दिन और छुट्टियां: सरकारी नियमों के अनुसार, पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू होने के बाद साल में 104 दिन शनिवार-रविवार के अवकाश होते हैं। इसके अलावा 63 दिन की विभिन्न छुट्टियां (30 अर्जित अवकाश, 13 आकस्मिक अवकाश, 20 चिकित्सा अवकाश) और करीब 30 सरकारी व ऐच्छिक अवकाश मिलते हैं। इस तरह 365 दिनों में से लगभग 197 दिन अवकाश रहता है, और कर्मचारियों को सालभर में कुल 168 दिन ही काम करना पड़ता है। इसके बावजूद समय का पालन न करना चिंता का विषय रहा है।
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रजिस्टर प्रणाली की कमियां दूर होंगी: वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारी रजिस्टर में हस्ताक्षर करने के बाद अक्सर दफ्तर से गायब हो जाते हैं, जिससे यह ट्रैक करना असंभव होता है कि वे पूरे समय कार्यालय में उपस्थित रहे या नहीं। बायोमेट्रिक सिस्टम आने से कर्मचारी के आने (Entry) और जाने (Exit) दोनों का सटीक डिजिटल समय दर्ज होगा।
प्रशासनिक सख्ती और बार-बार चेतावनी
सरकार की तरफ से पिछले कुछ महीनों (जनवरी, मई और अगस्त) में अनुशासन और समय पर कार्यालय पहुंचने को लेकर कई बार सख्त निर्देश जारी किए जा चुके हैं। गत 25 अगस्त को सरकार ने स्पष्ट किया था कि बायोमेट्रिक अटेंडेंस को अब जमीनी स्तर पर कड़ाई से लागू किया जाएगा। संबंधित अधिकारी इस नई डिजिटल प्रणाली की रूपरेखा तैयार करने में जुट गए हैं, ताकि सरकारी कामकाज में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही लाई जा सके।




