एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट: मेट्रो लाइन के दोनों तरफ 500-500 मीटर का दायरा बनेगा ‘विशेष विकास क्षेत्र’, ऊंची इमारतों और मिक्स्ड लैंड यूज को मिलेगा बढ़ावा
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के भविष्य के विकास को आकार देने वाले ‘मास्टर प्लान-2047’ के ड्राफ्ट में एक बेहद महत्वपूर्ण और आधुनिक प्रस्ताव सामने आया है। इसके तहत शहर में दौड़ने वाली मेट्रो लाइन के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे को ‘विशेष विकास क्षेत्र’ (Special Development Zone) के रूप में विकसित करने की योजना है। इस ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) मॉडल का उद्देश्य मेट्रो स्टेशनों के आसपास ही लोगों को आवास, बाजार, दफ्तर और अन्य दैनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिससे परिवहन और समय की बचत हो सके।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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मेट्रो के दोनों तरफ 500 मीटर का विशेष दायरा: मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट के अनुसार, मेट्रो स्टेशनों और पटरियों के दोनों तरफ 500-500 मीटर के क्षेत्र को एक नए रूप में संवारा जाएगा। यहां ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी कि नागरिकों को रोजमर्रा के कामों के लिए दूर न जाना पड़े।
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पुनर्विकास (Redevlopment) और ऊंची इमारतें: इस प्रस्ताव के तहत पुराने भवनों और घनी बस्तियों के पुनर्विकास की राह खुलेगी। तय नियमों के तहत छोटे भूखंडों को आपस में जोड़कर बड़े प्लॉट बनाए जा सकेंगे और 12 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों के पास ऊंची इमारतों (High-rises) के निर्माण को अनुमति मिल सकती है।
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मिश्रित उपयोग (Mixed Land Use): इस जोन में एक ही परिसर या इमारत में घर के साथ-साथ दुकान या दफ्तर चलाने यानी मिश्रित उपयोग की अनुमति देने का प्रस्ताव है, जिससे लोग पैदल या साइकिल से ही अपने गंतव्य तक पहुंच सकें और निजी वाहनों पर निर्भरता घटे।
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विशेषज्ञों की चिंताएं और चुनौतियां: टाउन प्लानर्स (जैसे शीतल शर्मा और सुमित गोठी) का मानना है कि यद्यपि यह कॉन्सेप्ट आधुनिक शहरों के लिहाज से बेहतरीन है, लेकिन भोपाल जैसे टियर-2 शहर में इसे लागू करना बुनियादी ढांचे (सीवेज, पार्किंग, और पानी) के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि बुनियादी ढांचे को समय रहते अपग्रेड नहीं किया गया, तो पुराने इलाकों की सड़कों पर दबाव बढ़ सकता है और भोपाल के प्राकृतिक ‘ब्लू-ग्रीन नेटवर्क’ व शांत माहौल को नुकसान पहुंच सकता है।




