एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय का बुरा हाल: 4280 कुल सीटों पर सिर्फ 234 प्रवेश; एमए हिंदी में बचा है सिर्फ 1 छात्र, 7 कोर्सों में एक भी एडमिशन नहीं
भोपाल: हिंदी भाषा और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के मुख्य उद्देश्य के साथ वर्ष 2011 में भोपाल में स्थापित अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में छात्रों की घटती संख्या गंभीर चिंता का विषय बन गई है। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय के कई प्रमुख पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों के आंकड़े दहाई तक भी नहीं पहुंच पा रहे हैं, और एमए हिंदी जैसे मूल विषय में वर्तमान में सिर्फ एक ही छात्र अध्ययनरत है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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प्रवेश के चौंकाने वाले आंकड़े: विश्वविद्यालय में वर्तमान शैक्षणिक सत्र के दौरान उपलब्ध कुल 4280 सीटों के मुकाबले मात्र 234 विद्यार्थियों ने ही प्रवेश लिया है। सरकार द्वारा हर साल इस विश्वविद्यालय को करीब 3.50 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यह अपनी अपेक्षित साख और छात्र संख्या बनाने में विफल रहा है।
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प्रमुख पाठ्यक्रमों में इकलौते छात्र: विश्वविद्यालय की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एमए हिंदी, एमए भूगोल, अर्थशास्त्र और एमबीए जैसे पाठ्यक्रमों में सिर्फ एक-एक विद्यार्थी ही अध्ययनरत है। वहीं, एमए इतिहास में 3, एलएलएम में 5 और एमएफए में 6 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।
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7 कोर्सों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य: विश्वविद्यालय में कुल 68 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन वर्तमान सत्र में सात ऐसे पाठ्यक्रम हैं जिनमें एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है। इनमें एमएससी भौतिकी, एमएससी वनस्पतिशास्त्र, एमए योग, एमएससी रसायन, एमएससी कंप्यूटर और एमकाम शामिल हैं।
पिछले वर्षों के प्रवेश आंकड़े
विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद से विभिन्न वर्षों में कुल प्रवेश की स्थिति इस प्रकार रही है:
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2026-27: 234
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2025-26: 174
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2024-25: 287
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2023-24: 366
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2022-23: 237
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2021-22: 366
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2020-19: 438
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2019-18: 438
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2018-17: 525
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2017-16: 615
विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष
अक्टूबर 2020 में पुराने मिंटो हॉल से विश्वविद्यालय को विदिशा रोड स्थित सूखी सेवनिया के नवनिर्मित परिसर (लागत 5 करोड़ रुपये) में स्थानांतरित किया गया था। यहां नियमित शिक्षकों (वर्तमान में स्वीकृत 27 पदों के मुकाबले कुल 35 शिक्षक व अतिथि शिक्षक) और छात्रावास जैसी सुविधाएं होने के बावजूद छात्रों का रुझान कम है। विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. डीए हिंडोलिया का कहना है कि परिसर तक आने-जाने के लिए नियमित बस सुविधा का न होना कम छात्र संख्या का एक बड़ा कारण है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि सभी समस्याओं की पहचान कर समाधान के लिए जल्द ही ठोस प्रयास किए जाएंगे।




