एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश के 2.46 लाख पेंशनरों को एरियर के लिए करना होगा और इंतजार: छठवें और सातवें वेतनमान के बकाए का मामला सुप्रीम कोर्ट में अटका, सरकार लेगी स्टे
भोपाल: मध्य प्रदेश के लाखों पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश के 2 लाख 46 हजार पेंशनरों को छठवें वेतनमान के 32 महीने के एरियर के लिए अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जनवरी 2006 से अगस्त 2008 तक के इस एरियर (लगभग 400 करोड़ रुपये) और सातवें वेतनमान के बकाए (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) का भुगतान न होने के कारण मामला अदालतों और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अवमानना के मामलों से बचने के लिए अब राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अदालतों में स्टे (स्थगन) प्राप्त करें।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कितने पेंशनर हैं प्रभावित: छठवें वेतनमान का एरियर उन सभी लगभग 2.46 लाख पेंशनर्स को मिलना था जो 31 दिसंबर 2005 को जीवित थे। वहीं, सातवें वेतनमान के दायरे में लगभग 4.50 लाख पेंशनर्स आते हैं, जिसके भुगतान पर सरकार को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आएगा।
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हाईकोर्ट के आदेश और अवमानना याचिकाएं: छठवें (जनवरी 2006 से अगस्त 2008) और सातवें (जनवरी 2016 से मार्च 2018) वेतनमान के एरियर भुगतान को लेकर हाईकोर्ट ने पेंशनर्स के पक्ष में फैसला दिया था। समय पर भुगतान न होने पर पेंशनर्स ने अवमानना याचिकाएं दायर की हैं, जिन्हें सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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वित्त विभाग के निर्देश (स्टे प्राप्त करने के आदेश): अदालत की अवमानना से बचने के लिए वित्त विभाग ने सभी विभागों को निर्देशित किया है कि वे सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की तर्ज पर हाईकोर्ट के आदेशों पर स्थगन (स्टे) प्राप्त करें, ताकि जब तक शीर्ष अदालत का अंतिम निर्णय न आ जाए, तब तक भुगतान के दबाव से बचा जा सके।
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संवैधानिक पीठ में विचाराधीन मामला: पेंशनर्स के एरियर का यह पूरा मामला अब सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ में पहुंच गया है। देश के अन्य राज्यों के हाईकोर्ट के फैसलों के मद्देनजर, हाईकोर्ट की डबल बेंच ने यह तय किया है कि जब तक संवैधानिक पीठ से अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।




