एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
एनजीटी में नगर निगम का बड़ा खुलासा: भोपाल के छोटे तालाब में अब भी मिल रहा 8 एमएलडी अनुपचारित सीवेज, 2.10 करोड़ रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ‘वेटलैंड’ और ऐतिहासिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर स्थिति एक बार फिर चिंताजनक बनी हुई है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में नगर निगम द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि बाणगंगा और एक अन्य नाले के जरिए प्रतिदिन करीब 8 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) गंदा सीवेज बिना किसी शोधन (Treatment) के सीधे छोटे तालाब में मिल रहा है। इस गंभीर लापरवाही पर एनजीटी सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने 2.10 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन किया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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तालाब में मिल रहा 8 एमएलडी सीवेज: एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच में याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान निगम ने स्वीकार किया कि हालांकि 37 नालों को डायवर्ट किया जा चुका है, फिर भी बाणगंगा नाले से 6 एमएलडी और पुराने मछलीघर के पास से लगभग 2 एमएलडी अनुपचारित सीवेज सीधे छोटे तालाब में गिर रहा है।
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2.10 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति: तालाब में लगातार गंदा पानी मिलने और प्रदूषण फैलने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 31 मार्च से 31 दिसंबर 2027 तक की अवधि के लिए 2.10 करोड़ रुपये के हर्जाने का आकलन किया गया है। हालांकि, इस क्षतिपूर्ति राशि पर अंतिम मुहर एनजीटी द्वारा लगाई जानी बाकी है।
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एनजीटी की सख्त निर्देश और अगली सुनवाई: न्यायाधिकरण ने नगर निगम को वेटलैंड की सुरक्षा सुनिश्चित करने, जलस्रोतों में गंदा पानी जाने से रोकने और वेटलैंड क्षेत्र में हुए अनधिकृत निर्माणों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई आगामी 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
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10 एमएलडी एसटीपी का निर्माण शुरू: नगर निगम ने एनजीटी को आश्वस्त किया है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए 10 एमएलडी क्षमता के नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। 11 सितंबर 2026 को शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2027 तक तय किया गया है।




