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खानूगांव की ‘शत्रु संपत्ति’ पर बड़ा ट्विस्ट, 2005 के रिकॉर्ड ने खोला नया पेच; 25 नोटिसधारियों ने रखे दस्तावेज

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

खानूगांव की ‘शत्रु संपत्ति’ विवाद में बड़ा मोड़: रियाज मंजिल और 8 एकड़ जमीन मामले में 25 नोटिसधारियों ने पेश किए दस्तावेज, 2005 के रिकॉर्ड और 2020 की जांच पर उठाए सवाल

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के खानूगांव स्थित ऐतिहासिक ‘रियाज मंजिल’ और करीब आठ एकड़ भूमि को ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) घोषित करने की कार्रवाई में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। सोमवार को बैरागढ़ एसडीएम के समक्ष सुनवाई के दौरान 25 नोटिसधारियों ने अपने लिखित जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत किए। इन जवाबों में संपत्ति के स्वामित्व, वर्ष 2024 के शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता और पूर्व के राजस्व रिकॉर्ड्स को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं, जिससे मामले की गुत्थी और उलझती नजर आ रही है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 25 नोटिसधारियों द्वारा दस्तावेज पेश: एसडीएम के सामने पेश किए गए जवाबों में नोटिसधारियों ने संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर वर्ष 2005 के नामांतरण आदेश और वर्ष 2020 की राजस्व जांच का हवाला दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई अब आगामी 6 अक्टूबर को होगी।

  • 2005 के नामांतरण आदेश का हवाला: नोटिसधारी मोहम्मद यूसुफ खान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता खालिद हफीज ने वर्ष 2005 का नामांतरण आदेश पेश किया। इसके अनुसार, करीब दो दशक पहले राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर खसरा नंबर 42 का नामांतरण साजिदा सुल्तान के नाम दर्ज किया गया था। ऐसे में उसी भूमि को आफताब जहां बेगम की संपत्ति मानकर शत्रु संपत्ति घोषित करने के आधार पर सवाल उठाए गए हैं।

  • 2020 की राजस्व जांच बनी मुख्य आधार: आपत्तियों में वर्ष 2018-19 के राजस्व प्रकरण (क्रमांक 337/अ-6) का जिक्र करते हुए बताया गया है कि तत्कालीन तहसीलदार (संत हिरदाराम नगर) ने जांच के बाद आफताब जहां के पक्ष में ‘हिबानामा’ (Hibanama) के आधार पर किए गए नामांतरण दावे को सिद्ध नहीं माना था। जब पूर्व में मालिकाना हक स्थापित नहीं हुआ, तो वर्ष 2024 में इसे शत्रु संपत्ति कैसे बनाया गया, यह बड़ा सवाल है।

  • मुंबई कार्यालय से मूल रिकॉर्ड बुलाने की मांग: नोटिसधारियों ने 29 अप्रैल 2024 को जारी शत्रु संपत्ति प्रमाण-पत्र की प्रामाणिकता पर संदेह जताते हुए शत्रु संपत्ति अभिरक्षक (Custodian of Enemy Property) कार्यालय, मुंबई से संबंधित फाइल नंबर 16-01-03/84 की नोटशीट, अनुमोदन आदेश और सत्यापन रिपोर्ट का मूल/प्रमाणित रिकॉर्ड तलब करने की मांग की है।

  • हाई Court के आदेश का संरक्षण: इस मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 24 सितंबर को दिए अपने आदेश में अगली तारीख तक संबंधित कारण बताओ नोटिस के आधार पर किसी भी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई करने पर रोक लगाई है, जिसका हवाला देते हुए पक्षकारों ने सुरक्षा की मांग की है।

  • प्रमुख जांच बिंदु: इस पूरे कानूनी विवाद में अब यह मुख्य रूप से स्पष्ट होना बाकी है कि खसरा नंबर 42 का वास्तविक विधिक स्वामी कौन था, 2005 में साजिदा सुल्तान का नाम किस आधार पर आया, और 2024 के प्रमाण-पत्र का आधार क्या था।

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