एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल स्वास्थ्य डेस्क
एम्स भोपाल की मोर्चुरी हुई हाईटेक: अब अलग-अलग औजारों की नहीं पड़ेगी जरूरत, एक ही ट्रॉली में मिलेंगे सभी उपकरण; स्टाफ को दी गई विशेष ट्रेनिंग
भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल की मोर्चुरी (शव गृह) को अब अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए हाईटेक बनाया जा रहा है। पोस्टमार्टम प्रक्रिया को और अधिक सुगम, वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए अब अलग-अलग औजारों को अलग से संभालने की झंझट खत्म कर दी गई है। इसके लिए अब एक विशेष ‘ऑटोप्सी ट्रॉली’ की व्यवस्था की गई है, जिसमें पोस्टमार्टम से जुड़े सभी उपकरण एक ही जगह करीने से उपलब्ध रहते हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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एक ही ट्रॉली में मिलेंगे सभी उपकरण: एम्स भोपाल ने इस नई व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए अपने मोर्चुरी स्टाफ के लिए विशेष ट्रेनिंग सत्र की शुरुआत की है। पहले दिन स्टाफ को ऑटोप्सी ट्रॉली का व्यावहारिक इस्तेमाल सिखाया गया। इस ट्रॉली में पोस्टमार्टम के औजार, सैंपल रखने की शीशियां, पट्टियां और बॉडी बैग से लेकर सभी जरूरी सामान करीने से एक ही स्थान पर रखे रहते हैं।
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जांच होगी अधिक साफ-सुथरी और पुख्ता: इस हाईटेक प्रणाली से न केवल काम तेजी से पूरा होता है, बल्कि पोस्टमार्टम और चिकित्सीय जांच भी अधिक साफ-सुथरी और पुख्ता होती है, जिससे मौत की असली वजह का पता लगाना और भी आसान हो जाता है।
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पूरे स्टाफ के लिए हिंदी में ट्रेनिंग: यह प्रशिक्षण सिर्फ डॉक्टरों तक सीमित नहीं था, बल्कि मोर्चुरी के रिसेप्शन से लेकर सफाई कार्य से जुड़े पूरे स्टाफ के लिए आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण को पूरी तरह व्यावहारिक और सरल रखते हुए हिंदी में समझाया गया ताकि हर कर्मचारी इसे आसानी से समझ सके।
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विशेषज्ञों का मार्गदर्शन: फॉरेंसिक विभाग के डॉ. सुहैल अलिक्कल ने प्रैक्टिकल करके बताया कि पोस्टमार्टम से पहले ट्रॉली को कैसे तैयार किया जाना चाहिए और कौन सा सामान कहां रखा रहता है। फॉरेंसिक विभाग के हेड प्रो. डॉ. अर्नीत अरोड़ा ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य एम्स की मोर्चुरी को वर्ल्ड-क्लास बनाना है, जिससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट की गुणवत्ता में और अधिक सुधार हो सके। इस दौरान मोर्चुरी मैनेजर मोहिनी अहिरवार, जगदीश परिहार, रोहित धनक सहित पूरा स्टाफ मौजूद रहा।




