एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / शिक्षा एवं प्रशासनिक डेस्क
शिक्षक भर्ती आंदोलन में पुलिस की आधी रात की कार्रवाई से उबाल: वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद वृद्धि की मांग को लेकर 57 दिन से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों को जबरन हटाया, महिला सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्ग-2 और वर्ग-3 शिक्षक भर्ती परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। गुरुवार को आंदोलन के 56वें दिन मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने निकले प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोशनपुरा चौराहे पर रोक लिया था। इसके बाद गुरुवार देर रात पुलिस ने भारी अमले के साथ कार्रवाई करते हुए धरने पर बैठे अभ्यर्थियों को जबरन वहां से हटाया और बसों में भरकर खजूरी सड़क थाने ले जाकर छोड़ दिया। आधी रात की गई इस बलपूर्वक कार्रवाई के बाद से अभ्यर्थियों में शासन-प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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देर रात पुलिस की बलपूर्वक कार्रवाई: गुरुवार को सीएम हाउस का घेराव करने पहुंचे अभ्यर्थियों को जब पुलिस ने आगे बढ़ने से रोका, तो उन्होंने रोशनपुरा चौराहे पर ही सड़क पर डेरा डाल दिया और पूरी रात वहीं डटे रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के बहाने पुलिस ने आधी रात को अचानक कार्रवाई करते हुए सभी आंदोलनकारियों को बसों में भरकर खजूरी सड़क थाने पहुंचा दिया।
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नियमों को ताक पर रखने और महिला सुरक्षा पर सवाल: इस आधी रात की कार्रवाई के बाद अभ्यर्थियों ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कानून के मुताबिक किसी भी महिला को रात्रि के समय गिरफ्तार या हिरासत में नहीं रखा जा सकता, बावजूद इसके पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर महिला अभ्यर्थियों के साथ यह कदम उठाया। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस रात के समय किसी भी महिला अभ्यर्थी के साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती, तो इसकी पूरी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी किसकी होती?
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57 दिन से जारी है संघर्ष: प्रदेशभर के विभिन्न जिलों से आए युवा पिछले 57 दिनों से लगातार शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती और पद वृद्धि की मांग को लेकर भोपाल में संघर्ष कर रहे हैं। गुरुवार को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के सामने एकजुट होने के बाद इन युवाओं ने मुख्यमंत्री निवास की ओर कूच किया था।
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मांगों पर अडिग रहने का संकल्प: आधी रात की इस दमनकारी कार्रवाई और पुलिस के खदेड़े जाने के बाद भी अभ्यर्थियों के हौसले टूटे नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी पद वृद्धि की मांग पूरी नहीं होती, उनका यह संघर्ष और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा। इस घटना के बाद राजधानी भोपाल के प्रशासनिक हलकों में भी सरगर्मी तेज हो गई है।




