एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / शिक्षा डेस्क
मध्य प्रदेश के स्कूलों में 8.66 लाख विद्यार्थियों का नामांकन घटा: पोर्टल पर प्रोफाइल और आधार अपडेट न होने से बढ़ी चिंता, कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी स्कूलों से जुड़ी एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के दौरान पहली से बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के नामांकन में पिछले साल की तुलना में 8.66 लाख से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि इसके वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि कुछ बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं, जबकि बड़ी वजह स्कूलों द्वारा पोर्टल पर विद्यार्थियों की प्रोफाइल और आधार सत्यापन समय पर न करना है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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नामांकन के आंकड़े (सत्रवार तुलना):
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सत्र 2025-26: 1,42,31,833 विद्यार्थी
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सत्र 2026-27: 1,33,65,225 विद्यार्थी
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कुल कमी: 8,66,608 विद्यार्थी
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राजधानी भोपाल का हाल: अकेले भोपाल जिले में पिछले साल की तुलना में इस साल 20,347 विद्यार्थियों का नामांकन कम दर्ज हुआ है। इसके अलावा भोपाल के 1,498 स्कूलों में 3,48,812 बच्चों की प्रोफाइल और 2,037 स्कूलों में शिक्षकों की प्रोफाइल अपडेट नहीं है। साथ ही 34,729 विद्यार्थी अभी भी ड्रॉपबॉक्स से स्कूलों में दर्ज नहीं किए गए हैं।
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प्रशासनिक सख्ती और नोटिस: राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक हरजिंदर सिंह ने लापरवाही बरतने पर 12 से अधिक जिलों के जिला परियोजना समन्वयकों (DPC) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय-सीमा में प्रोफाइल अपडेट और आधार सत्यापन के कार्य पूरे न होने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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प्रदेशभर की अन्य कमियां:
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प्रदेशभर में करीब 75.17 लाख विद्यार्थियों की प्रोफाइल अपडेट नहीं है।
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अब तक केवल 80.62 प्रतिशत बच्चों का ही आधार सत्यापन हो पाया है।
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1,70,802 विद्यार्थियों की ‘अपार आईडी’ (APAAR ID) अभी तक जनरेट नहीं हो सकी है।
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प्रमुख जिले जहां घटे सबसे ज्यादा छात्र: मऊगंज (12,567), अलीराजपुर (15,490), अशोकनगर (14,653), शिवपुरी (27,404), गुना (19,505), राजगढ़ (23,796), झाबुआ (21,399), श्योपुर (10,122), देवास (21,613) और सतना (19,606) शामिल हैं।
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राजनीतिक प्रतिक्रिया: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस भारी गिरावट पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, जिलेवार व स्कूलवार आंकड़ों का सत्यापन करने तथा ड्रॉपआउट बच्चों की शिक्षा फिर से शुरू करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।




