एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / शासन एवं प्रशासन डेस्क
मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का जाल: 8 हजार के पार पहुंची संख्या, दो साल से फाइलों में उलझे कड़े कानून के संशोधन
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन इन्हें रोकने के लिए पिछले दो साल से नियमों में संशोधन की कवायद केवल कागजों और फाइलों तक ही सीमित है। स्थिति यह है कि अवैध कॉलोनाइजरों पर नकेल कसने के लिए जुलाई के विधानसभा सत्र में नया संशोधन विधेयक लाने का दावा किया गया था, जो पूरा नहीं हो सका। ताज्जुब की बात यह है कि जिस विभाग के पास अवैध कॉलोनियों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है, उसके पास इनकी कोई ताजा और सटीक गिनती तक उपलब्ध नहीं है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
आठ हजार के पार पहुंची अवैध कॉलोनियां: पुराने सर्वे के मुताबिक प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियां चिह्नित की गई थीं। इसके बाद कोई व्यापक सर्वे नहीं हुआ, जिसके चलते अब इनकी संख्या बढ़कर 8 हजार के पार पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों और नगर पालिका-परिषद के इलाकों का पूरा आंकड़ा भी सरकार के पास स्पष्ट नहीं है।
-
वरिष्ठ सचिव समिति की आपत्तियों से देरी: अवैध कॉलोनाइजरों पर शिकंजा कसने के लिए लाए जा रहे नए नियमों के प्रावधानों पर वरिष्ठ सचिव समिति ने कुछ आपत्तियां और सुझाव दिए हैं। अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग को इसके आधार पर मसौदे में बदलाव करना होगा, जिसके बाद इसे दोबारा मंजूरी के लिए भेजना पड़ेगा।
-
प्रस्तावित कानून के कड़े प्रावधान:
-
10 साल की जेल और 5 करोड़ जुर्माना: अवैध कॉलोनी विकसित करने वालों के खिलाफ अधिकतम 10 साल की कैद और 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
-
अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों की जवाबदेही: कलेक्टर, निगम आयुक्त, पार्षद और सरपंच स्तर के जिम्मेदारों की भूमिका तय करने का प्रावधान है।
-
डिजिटल निगरानी: ऑनलाइन रिकॉर्ड की व्यवस्था ताकि संपत्ति खरीदने वाले लोग उसकी वैधता खुद जांच सकें।
-
ध्वस्तीकरण का अधिकार: अवैध निर्माण हटाने के लिए 15 दिन का नोटिस देने और कार्रवाई न होने पर नगरीय निकाय द्वारा खुद जमीन पर कब्जा लेकर निर्माण ध्वस्त करने का अधिकार।
-
-
प्रशासनिक पक्ष: भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा का कहना है कि अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के लिए ‘कॉलोनी सेल’ का गठन किया गया है। वर्तमान में किसी भी तरह की नई अवैध कॉलोनी विकसित न हो, इसके लिए सभी एसडीएम को सख्त निर्देश दिए गए हैं, जबकि नए नियमों को लेकर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है।




