एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / यातायात एवं बुनियादी ढांचा डेस्क
भोपाल अयोध्या बायपास 10-लेन प्रोजेक्ट बना जी का जंजाल: 6 अंडरपास बने ‘बॉटलनेक’, अधूरे और कच्चे रास्तों के कारण रोजाना लग रहा भीषण जाम
भोपाल: राजधानी भोपाल के बहुप्रतीक्षित अयोध्या बायपास को 10-लेन बनाने का प्रोजेक्ट फिलहाल वाहन चालकों के लिए राहत के बजाय बड़ी मुसीबत साबित हो रहा है। निर्माण कार्य के दौरान शहर के छह प्रमुख अंडरपास बॉटलनेक में तब्दील हो चुके हैं। रास्तों के संकरे होने, वैकल्पिक मार्गों के बदहाल और कच्चे होने तथा निर्माण एजेंसी द्वारा सुरक्षा व ट्रैफिक प्रबंधन के निर्देशों का पूरी तरह पालन न करने के कारण रोजाना भारी ट्रैफिक जाम लग रहा है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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जाम की प्रमुख 5 बड़ी वजहें:
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कच्चे रास्ते और गड्ढे: अंडरपास के पास ट्रैफिक डायवर्जन के लिए बनाए गए वैकल्पिक मार्ग अब तक पक्के नहीं किए गए हैं। गड्ढों और फैली गिट्टी के कारण चालक इनसे बचते हैं, जिससे मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
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महज 20 फीट का संकरा मार्ग: संकरे रास्तों पर दोनों दिशाओं से एक साथ वाहन आने के कारण आमने-सामने गाड़ियां फंस जाती हैं, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं।
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सड़क किनारे मिट्टी और मलबे के ढेर: खोदाई के बाद दोनों किनारों पर पड़े मिट्टी और मलबे के ढेरों से हादसों का खतरा बना रहता है।
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खुले कट प्वाइंट: अनियंत्रित कट प्वाइंट्स के खुले रहने से वाहन अचानक मुड़ते हैं, जिससे यातायात की गति बाधित होती है।
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कमजोर ट्रैफिक प्रबंधन: संकरे हिस्सों में सुचारू आवागमन के लिए मजबूत यातायात प्रबंधन की कमी भी जाम का एक बड़ा कारण है।
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यातायात पुलिस के 5 प्रमुख सुधार सुझाव: ट्रैफिक पुलिस द्वारा निर्माण एजेंसी को कुछ अहम सुधारों के निर्देश दिए गए थे, जिनमें कोलुआ जोड़ के आगे कट प्वाइंट बंद करना, मिनाल गेट क्र. 5 पर लेफ्ट टर्न व मिट्टी समतल करना, 11 नंबर अंडरपास के पास के खंभे हटवाना, 12 नंबर अंडरपास को वन-वे से टू-वे करना और मिनाल गेट क्र. 3 के सामने मिट्टी समतल कराना शामिल है।
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एजेंसी और पुलिस का पक्ष: एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देवांश नुवल का कहना है कि कच्चे रास्तों को चरणबद्ध तरीके से पक्का किया जा रहा है और मौके पर वालंटियर तैनात हैं। वहीं ट्रैफिक डीसीपी प्रभारी बसंत कौल का कहना है कि पुलिसकर्मी लगातार तैनात हैं और निर्देशों के बाद कुछ व्यवस्थाओं में सुधार भी हुआ है।




