एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / शासन एवं भ्रष्टाचार डेस्क
भोपाल आबकारी फर्जीवाड़ा मामला: पौने तीन करोड़ की फर्जी FDR और सत्यापन रिपोर्ट पर लोकायुक्त ने दर्ज किया केस, तत्कालीन OSD दीपम रायचुरा और ठेकेदार पर गिरी गाज, अब ED की जांच के आसार
भोपाल: राजधानी भोपाल में शराब दुकान के ठेके के आवंटन के लिए 2.75 करोड़ रुपये की कथित फर्जी एफडीआर (Fixed Deposit Receipt) और उसकी झूठी सत्यापन रिपोर्ट का इस्तेमाल करने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस प्रकरण में उपमुख्यमंत्री के तत्कालीन ओएसडी और पूर्व सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचुरा तथा शराब ठेकेदार जसवंत सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वित्तीय अनियमितताओं और रिश्वत के गंभीर तथ्य सामने आने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू किए जाने की संभावना है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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लोकायुक्त की सख्त कार्रवाई: लोकायुक्त पुलिस ने दीपम रायचुरा और ठेकेदार जसवंत सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत शनिवार को औपचारिक एफआईआर दर्ज कर ली है।
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फर्जी FDR और रिश्वत का मामला: दिल्ली सहित अन्य राज्यों में ठगी के आरोपी मोहित गोगिया द्वारा एक जांच एजेंसी को दिए गए कथित बयान में शराब दुकान का ठेका दिलाने के नाम पर 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की बात सामने आई थी, जिसके बाद आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना की जांच में एफडीआर कूटरचित (फर्जी) पाई गई थी।
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ईडी (ED) के शिकंजे में आ सकते हैं आरोपी: लोकायुक्त में मामला दर्ज होने के बाद वित्तीय लेनदेन, हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता तथ्य मिलने पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस पूरे प्रकरण में अपनी स्वतंत्र जांच शुरू कर सकता है।
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संपत्ति और आय से अधिक मामलों की जांच: लोकायुक्त द्वारा आरोपियों की संपत्तियों और आय के ज्ञात स्रोतों की जांच की जाएगी। आय से अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिलने पर अलग से मामला दर्ज किया जाएगा। साथ ही, बैंक अधिकारियों, आबकारी विभाग के अन्य कर्मचारियों और फाइल प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की भी गहन छानबीन होगी।




