एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / राजनीतिक डेस्क
मध्य प्रदेश में जल्द बदले जाएंगे मंत्रियों के प्रभार के जिले: केंद्रीय नेतृत्व से मिली हरी झंडी, दिसंबर के पहले पखवाड़े में होगा बदलाव; नए साल में टला मंत्रिमंडल विस्तार
भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में प्रशासनिक कसावट और मैदानी कामकाज को सुगम बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार और संगठन की ओर से केंद्रीय नेतृत्व को भेजे गए प्रस्तावों में से फिलहाल प्रभार के जिलों में बदलाव को हरी झंडी मिल गई है। सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर के पहले पखवाड़े तक मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में फेरबदल कर दिया जाएगा, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार को फिलहाल नए साल तक के लिए टाल दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास मंत्रियों के साल भर के कामकाज की रिपोर्ट भी मौजूद है, जिसके आधार पर यह निर्णय लिया गया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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दिसंबर के पहले पखवाड़े में बदलाव: मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में फेरबदल की प्रक्रिया दिसंबर के शुरुआती दो हफ्तों में पूरी कर ली जाएगी।
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मंत्रिमंडल विस्तार नए साल में: केंद्रीय संगठन को भेजे गए तीन प्रस्तावों (मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों में बदलाव और प्रभार जिले बदलना) में से अभी केवल जिलों के बदलाव पर मुहर लगी है, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार अब नए साल में ही विचाराधीन रहेगा।
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गृह जिले से दूरी बनी मुख्य वजह: वर्तमान व्यवस्था में कई मंत्रियों के गृह जिले और प्रभार वाले जिलों के बीच की दूरी बहुत अधिक है, जिससे प्रशासनिक और मैदानी कार्यों में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही थीं। इसे दूर करने के लिए अब मंत्रियों को उनके नजदीक के जिले प्रभार के रूप में दिए जाएंगे।
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अत्यधिक दूरी वाले प्रमुख उदाहरण:
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नागर सिंह चौहान: गृह जिला आलीराजपुर से प्रभार का जिला उमरिया (887 किमी दूर)।
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संपतिया उइके: गृह जिला मंडला से प्रभार का जिला आलीराजपुर (761 किमी दूर)।
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प्रद्युम्न सिंह तोमर: गृह जिला ग्वालियर से पांढुर्णा (675 किमी दूर)।
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कैलाश विजयवर्गीय: गृह जिला इंदौर से सतना (650 किमी दूर)।
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जगदीश देवड़ा: गृह जिला मंदसौर से जबलपुर (650 किमी दूर)।
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इसके अलावा प्रहलाद पटेल, करण सिंह वर्मा और राजेंद्र शुक्ला के प्रभार वाले जिले भी उनके गृह जिलों से सैकड़ों किलोमीटर दूर या विपरीत दिशाओं में स्थित हैं।
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