एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / आर्थिक एवं कृषि डेस्क
‘बीमारू राज्य’ से कृषि और औद्योगिक महाशक्ति बना मध्य प्रदेश: 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड जीतने के बाद अब इंडस्ट्रियल बूम; पिछले तीन साल में आए 12 लाख करोड़ के निवेश
भोपाल: कभी ‘बीमारू’ राज्य की श्रेणी में गिना जाने वाला मध्य प्रदेश आज देश के सबसे तेजी से उभरते हुए राज्यों में शुमार हो चुका है। नदियो का मायका और प्रचुर वन संपदा वाले इस राज्य ने अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति, बिजली-पानी की उपलब्धता और मजबूत नीतियों के दम पर न केवल कृषि के क्षेत्र में नए इतिहास रचे, बल्कि ‘कृषि कर्मण पुरस्कार’ लगातार 7 बार जीतकर पंजाब और हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया। अब कृषि के साथ-साथ औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर राज्य ने आर्थिक मोर्चे पर एक नई छलांग लगाई है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कृषि से लेकर नकदी फसलों तक का सफर: पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर राज्य में अब किसानों को टमाटर, मटर, प्याज, आम, अमरूद और संतरा जैसी उद्यानिकी (हॉर्टिकल्चर) और नकदी फसलों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) पर जोर देकर किसानों को उनकी उपज के बेहतर दाम दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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दुग्ध उत्पादन और गोपालन को प्रोत्साहन: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए दुग्ध उत्पादन और गोपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूध पर 5 रुपये प्रति लीटर प्रोत्साहन राशि और गोशालाओं में चारे के लिए 40 रुपये प्रति गोवंश तक अनुदान का प्रावधान किया गया है।
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औद्योगिक निवेश और 12 लाख करोड़ जमीन पर: बुनियादी ढांचे (सड़क, बिजली, पानी) को मजबूत करने और ‘उद्योग मित्र’ नीतियां लागू करने का परिणाम यह रहा है कि पिछले तीन वर्षों में 12 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतरा है, जिससे 6 लाख से अधिक नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
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बढ़ता निर्यात (Export): फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य का कुल निर्यात बढ़कर 66,218 करोड़ रुपये पहुंच गया है; जिसमें फार्मास्यूटिकल (11,968 करोड़), एनिमल फीड (6,062 करोड़), मशीनरी (5,497 करोड़) और एल्युमिनियम (4,795 करोड़) का प्रमुख योगदान है। आगामी फरवरी 2027 में एक बार फिर भव्य ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) की तैयारी है।




