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मप्र में कंपनियों पर लगे फर्जी प्लेसमेंट के आरोप; विभाग ने रोका भुगतान

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)

भोपाल / रोजगार एवं भ्रष्टाचार डेस्क

प्रधानमंत्री अभ्युदय योजना में फर्जी प्लेसमेंट का बड़ा खुलासा: 32.41 करोड़ की योजना में कई नियुक्ति पत्र निकले फर्जी; RTI से पोल खुलने के बाद मैपसेट ने रोका भुगतान

भोपाल: अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने वाली केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री अभ्युदय योजना’ में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का संदेह गहरा गया है। योजना के तहत प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों पर 70 प्रतिशत युवाओं को प्लेसमेंट (रोजगार) दिलाने का अनुबंध था, लेकिन जब जमीनी हकीकत सामने आई तो कई प्रशिक्षणार्थियों ने नौकरी मिलने से साफ इंकार कर दिया। मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू यह है कि दो प्रमुख प्रतिष्ठानों ने अपने नाम से जारी किए गए नियुक्ति पत्रों को पूरी तरह फर्जी बताते हुए उन पर लगी मुहर और हस्ताक्षरों को भी जाली करार दिया है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 32.41 करोड़ रुपये की योजना: यह पूरा मामला वर्ष 2020-21 और 2021-22 का है। आयुक्त, अनुसूचित जाति विकास कार्यालय के आदेशानुसार इस योजना के तहत कुल 32.41 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया था।

  • लक्ष्य और फर्जीवाड़ा: एक एजेंसी को 355 और दूसरी एजेंसी को 420 युवाओं को रोजगार दिलाने का लक्ष्य दिया गया था। एजेंसियों ने कागजों में लक्ष्य पूरा दिखाने के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार कर दिए, लेकिन जब इसकी गहराई से पड़ताल हुई तो पोल खुल गई।

  • आरटीआई (RTI) से हुआ खुलासा: सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जब इस योजना के प्लेसमेंट रिकॉर्ड की जानकारी बाहर आई, तब इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

  • मैपसेट (MAPSET) और विभाग की कार्रवाई: मामला सामने आने के बाद मप्र रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद (मैपसेट) ने त्वरित कदम उठाते हुए एजेंसियों का भुगतान रोक दिया है। मैपसेट के प्रबंध निदेशक तरुण राठी ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी।

  • जिम्मेदारों का पक्ष: अनुसूचित कल्याण विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह ने जानकारी दी कि 70 प्रतिशत का अनिवार्य प्लेसमेंट लक्ष्य पूरा न होने और गड़बड़ियों की शिकायतों के चलते एजेंसियों की भुगतान प्रक्रिया पर रोक लगाई गई है।

  • योजना का उद्देश्य: इस योजना के तहत 10वीं कक्षा उत्तीर्ण एससी वर्ग के युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और रोजगार दिलाना है, लेकिन एजेंसियों की धांधली के कारण इसका उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

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