एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
उज्जैन के 4000 साल पुराने इतिहास की होगी तलाश: पुरातत्व संचालनालय पूरे जिले में पुरास्थलों का नए सिरे से करवाएगा सर्वेक्षण, ताम्रपाषाणकालीन संस्कृति पर फोकस
भोपाल: धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी उज्जैन के प्राचीन महत्व को और गहराई से खंगालने के लिए मध्य प्रदेश पुरातत्व संचालनालय ने एक बड़ी पहल की है। विभाग द्वारा पूरे उज्जैन जिले में पुरास्थलों का नए सिरे से सर्वेक्षण (Survey) करने की तैयारी की जा रही है, जिसमें ताम्रपाषाणकालीन संस्कृति से जुड़े प्रमुख स्थलों के साथ-साथ अन्य ज्ञात और संभावित पुरास्थलों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। सर्वेक्षण के बाद महत्वपूर्ण मिलने वाले स्थानों पर उत्खनन और शोध कार्य भी किए जाएंगे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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4000 साल पुरानी संस्कृति की पड़ताल: उज्जैन में ताम्रपाषाणकालीन संस्कृति (जो लगभग 2000 ईसा पूर्व यानी करीब 4000 साल पुरानी मानी जाती है) के प्रमाण पहले भी मिल चुके हैं। कायथा, नागदा और दंगवाड़ा इसके प्रमुख केंद्र रहे हैं। इस नए सर्वेक्षण के जरिए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि प्राचीन मानवों ने बसाहट के लिए इन क्षेत्रों का चयन क्यों किया था और उनका रहन-सहन व प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कैसा था।
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इन प्रमुख स्थलों का होगा अध्ययन: प्रस्ताव के मुताबिक, रूनिजा, बड़नगर, महिदपुर, गढ़कालिका, दांगवाड़ा, वैश्य टेकरी (अशोककालीन स्तूप) और कुम्हार टेकरी जैसे महत्वपूर्ण पुरास्थलों की मैपिंग और जांच की जाएगी।
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आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल: नए और अज्ञात पुरास्थलों की खोज के लिए उपग्रह (Satellite) से प्राप्त चित्रों और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) की मदद ली जाएगी। इसके बाद पुरातत्व विभाग की टीमें मौके पर जाकर उच्च गुणवत्ता वाली फोटोग्राफी, ड्रोन सर्वे और 3-डी प्रतिरूप (3D Models) तैयार करेंगी।
संरक्षण और खतरे वाले स्थलों की पहचान
इस व्यापक सर्वेक्षण के दौरान खेती, अतिक्रमण, अवैध उत्खनन, निर्माण कार्यों, जल कटाव और तेजी से हो रहे शहरी विस्तार से प्रभावित होने वाले पुरास्थलों को विशेष रूप से चिह्नित किया जाएगा। इसके आधार पर यह प्राथमिकता तय की जाएगी कि किन ऐतिहासिक स्थलों को तुरंत संरक्षण की आवश्यकता है। इस पूरी कवायद से उज्जैन की प्राचीन बसाहटों और उसकी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत से जुड़े कई अनछुए पहलू सामने आने की उम्मीद है।




