एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / स्वास्थ्य डेस्क
मध्य प्रदेश के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों का भारी टोटा: 5086 स्वीकृत पदों में से 50% यानी 2550 से अधिक पद खाली; डॉक्टरों को लुभाने के लिए अब ‘सुषेण भत्ता योजना’ का दायरा बढ़ाएगी सरकार
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी स्वास्थ्य ढांचागत व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। तमाम प्रयासों, वाक-इन इंटरव्यू और डॉक्टरों की बोली लगवाकर नियुक्ति देने जैसे विज्ञापनों के बावजूद प्रदेश के जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और सिविल अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लगभग 50 प्रतिशत पद रिक्त पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 5,086 स्वीकृत पद हैं, जिनके मुकाबले जमीनी स्तर पर केवल 2,579 डॉक्टर ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि आधे से अधिक पद खाली होने के कारण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
एनेस्थीसिया और रेडियोलॉजी में सबसे बुरा हाल
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों में गंभीर बीमारियों और ऑपरेशनों के लिए जरूरी माने जाने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों का सबसे अधिक टोटा है। विशेष तौर पर एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के 59 प्रतिशत पद खाली चल रहे हैं, जिससे जिला स्तर पर बड़े ऑपरेशन और सिजेरियन डिलीवरी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रमुख चिकित्सा विषयों में स्वीकृत और कार्यरत डॉक्टरों के आंकड़े इस प्रकार हैं:
| विशेषज्ञता (Specialization) | स्वीकृत पद | कार्यरत डॉक्टर |
| एनेस्थीसिया (Anaesthesia) | 714 | 295 |
| नाक, कान एवं गला (ENT) | 161 | 113 |
| जनरल मेडिसिन | 734 | 359 |
| जनरल सर्जरी | 685 | 294 |
| स्त्री एवं प्रसूति रोग (Gynecology) | 781 | 450 |
| शिशु रोग (Paediatrics) | 958 | 485 |
| रेडियोलॉजी (Radiology) | 173 | 31 |
| कुल योग (अन्य सहित) | 5,086 | 2,579 |
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने की चुनौती
वर्तमान में प्रदेश की शिशु मृत्यु दर (IMR) 35 प्रति हजार है, यानी प्रति एक हजार जीवित जन्मों पर एक वर्ष के भीतर 35 शिशुओं की मौत हो जाती है। इस गंभीर आंकड़े को नीचे लाने और संस्थागत प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय पर सिजेरियन डिलीवरी (Operation Delivery) होना बेहद आवश्यक है। हालांकि, मौजूदा समय में प्रदेशभर में मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों को मिलाकर मात्र 108 अस्पताल ऐसे हैं, जहां नियमित रूप से सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है।
‘सुषेण भत्ता योजना’ का दायरा बढ़ाने की तैयारी में सरकार
विशेषज्ञ डॉक्टरों को सुदूर और ग्रामीण अंचलों के अस्पतालों तक आकर्षित करने के लिए सरकार ने पहले 25 प्रतिशत पदों को सीधे भरने की विशेष व्यवस्था लागू की थी, लेकिन उसका कोई खास सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। अब सरकार ने डॉक्टरों को लुभाने के लिए ‘सुषेण भत्ता योजना’ (Sushen Allowance Scheme) के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने का निर्णय लिया है।
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गैर-दूरस्थ अस्पतालों को भी मिलेगा लाभ: अभी तक यह भत्ता केवल चिह्नित दूरस्थ (Remote) क्षेत्रों में पदस्थ डॉक्टरों को ही दिया जाता था। अब इस योजना में ऐसे अस्पतालों को भी शामिल किया जाएगा, जो भौगोलिक रूप से दूरस्थ नहीं हैं, लेकिन वहां सिजेरियन डिलीवरी की सुविधाएं शुरू की जा सकती हैं।
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20% अतिरिक्त वेतन भत्ते: इन गैर-दूरस्थ अस्पतालों में पदस्थ होने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को सामान्य डॉक्टरों की तुलना में लगभग 20 प्रतिशत अतिरिक्त सुषेण भत्ता दिया जाएगा, जिससे वे शासकीय सेवा की ओर आकर्षित हों। इस प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए राज्य कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
इस संबंध में उप मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल का कहना है कि प्रदेश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए लगातार नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं और डॉक्टरों के हितों को ध्यान में रखते हुए अन्य नीतिगत प्रावधान भी किए जा रहे हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को मैदानी स्तर पर पूरी तरह सुदृढ़ किया जा सके।




