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बाजार में ₹20 हजार की मोटर, नगर निगम ने ₹45 हजार में खरीदी

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)

भोपाल / भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक भ्रष्टाचार डेस्क

भोपाल नगर निगम में मोटर खरीदी का बड़ा घोटाला: जीआईएस के दौरान बाजार से दोगुनी कीमत पर खरीदी गईं फाउंटेन मोटरें; 20 हजार की मोटर के चुकाए 45 हजार, लोकायुक्त जांच लंबित

भोपाल: राजधानी में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के दौरान नगर निगम द्वारा की गई खरीदी में एक और बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। फव्वारों (फाउंटेन) के लिए खरीदी गई मोटरों के दाम में भारी हेराफेरी करते हुए शासन के नियमों और बाजार भाव दोनों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। जिन मोटरों की खुले बाजार में कीमत 20 से 34 हजार रुपये के बीच है, उनके लिए नगर निगम ने 45 हजार से लेकर 58 हजार 500 रुपये तक का भुगतान किया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये दरें नगरीय प्रशासन विभाग की एसओआर (SOR) सूची में दर्ज होने के बावजूद, इन्हें ‘नॉन-एसओआर’ बताकर मनमाने दामों पर खरीदा गया।

प्रमुख बिंदु (Highlights)

  • बाजार भाव से लगभग दोगुनी कीमत: जीआईएस के आयोजन के दौरान नगर निगम ने फाउंटेन के लिए 7.5 एचपी (HP) की मोटर 45,000 रुपये में खरीदी, जबकि बाजार में किर्लोस्कर कंपनी की ऐसी मोटर करीब 20,000 रुपये और सीजी (CG) कंपनी की मोटर लगभग 27,000 रुपये में उपलब्ध है। यानी निगम ने बाजार मूल्य से 18,000 से 25,000 रुपये तक ज्यादा चुकाए।

  • 10 एचपी मोटर पर भी भारी अधिक भुगतान: इसी तरह 10 एचपी की मोटर के लिए 58,500 रुपये का भुगतान किया गया, जबकि बाजार में सीजी की मोटर करीब 32,000 और किर्लोस्कर की मोटर लगभग 34,000 रुपये में मिल जाती है। इस प्रकार निगम ने इस पर 24,500 से 26,500 रुपये तक अतिरिक्त खर्च किए।

  • एसओआर (SOR) नियमों की अनदेखी: नगरीय प्रशासन विभाग की एसओआर सूची के अनुसार, 7.5 एचपी मोटर की निर्धारित दर 31,955 रुपये और 10 एचपी मोटर की दर 37,416 रुपये है। इसके बावजूद अधिकारियों ने इन निर्धारित दरों को ताक पर रखकर इन्हें नॉन-एसओआर श्रेणी में दर्शाया और एसओआर के मुकाबले भी 7.5 एचपी पर 13,045 रुपये तथा 10 एचपी मोटर पर 21,084 रुपये अतिरिक्त भुगतान कर दिया।

लोकायुक्त जांच में लीपापोती और अधिकारियों की मिलीभगत

इस पूरे वित्तीय फर्जीवाड़े को लेकर लोकायुक्त में नगर निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग और प्रभारी कार्यपालन यंत्री आरके त्रिवेदी के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले में लोकायुक्त ने जब निगम को जांच के लिए पत्र लिखा, तो निगम प्रशासन ने गजब की लापरवाही बरतते हुए जांच की जिम्मेदारी आरोपी अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग को ही सौंप दी। स्वाभाविक रूप से उदित गर्ग ने अपनी ही जांच में खुद को तमाम बिंदुओं पर क्लीन चिट दे दी।

जब यह मामला लोकायुक्त के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए दोबारा निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। हालांकि, इसके बावजूद पिछले 4-5 महीनों से जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को नहीं सौंपी गई है। लोकायुक्त के मुख्य अभियंता अविनाश नेमा ने बताया कि निगम की पहली जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताए जाने के बाद अब यह मामला नगरीय प्रशासन विभाग को भेजा गया है। नगरीय प्रशासन विभाग के आयुक्त अगले महीने लोकायुक्त के समक्ष पेश होकर इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

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