एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / स्वास्थ्य एवं श्रम डेस्क
दीपावली के जश्न के बीच अस्पतालों के आउटसोर्स कर्मियों पर आफत: कई जिलों में 2 से 6 महीने से वेतन बकाया; एक हफ्ते में भुगतान न होने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी
भोपाल: जहां एक ओर पूरा प्रदेश धनतेरस और दीपावली के पावन पर्व की खुशियों में डूबा हुआ है, वहीं सरकारी अस्पतालों में दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों के घरों में चूल्हा जलना भी दूभर हो गया है। राज्य के विभिन्न जिलों में पिछले 2 से 6 महीने से वेतन न मिलने के कारण इन कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि कर्मचारियों के पास अपने बच्चों की स्कूल फीस, इलाज के लिए दवाइयां और मकान का किराया चुकाने तक के पैसे नहीं बचे हैं।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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विभिन्न जिलों में महीनों से अटका वेतन: आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने बताया कि अस्पतालों की व्यवस्थाओं की रीढ़ कहे जाने वाले इन कर्मियों का वेतन अधिकारियों और एजेंसियों की कथित कमीशनखोरी के चलते महीनों से अटका पड़ा है। जिलोंवार स्थिति बेहद खराब है:
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नीमच: 6 महीने से वेतन ठप
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छिंदवाड़ा: 5 महीने से वेतन नहीं मिला
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सागर, बैतूल, ग्वालियर और उमरिया: 4 महीने से वेतन लंबित
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सिवनी मालवा: 3 महीने से भुगतान बंद
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कटनी: 2 महीने से वेतन नहीं मिला
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त्योहारों पर आंसू बहाने को मजबूर परिवार: कर्मचारियों का कहना है कि जहां लोग अपने परिवारों के साथ त्योहार मना रहे हैं, वहीं वेतन न मिलने के कारण उनके बच्चे खाली पेट और मायूस होकर आंसू बहाने को मजबूर हैं।
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संघ का अल्टीमेटम: कर्मचारी संघ ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि सभी कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन तत्काल जारी किया जाए और उनका कथित रूप से शोषण करने वाली एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो प्रदेशभर के स्वास्थ्य कर्मी काम बंद कर सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे।




