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भोपाल में आंदोलनरत शिक्षकों का एलान! नहीं भरेंगे TET परीक्षा का फॉर्म, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा धरना

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों का उग्र आंदोलन: अनिश्चितकालीन धरने का तीसरा दिन, TET परीक्षा और ई-अटेंडेंस के खिलाफ ग्वालियर-चंबल संभाग के शिक्षकों ने भरी हुंकार

भोपाल: मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में लंबित विभिन्न मांगों को लेकर ‘अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ के बैनर तले शिक्षकों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को तीसरे दिन भी राजधानी के नीलम पार्क में जारी रहा। आंदोलन के तीसरे दिन ग्वालियर और चंबल संभाग से भारी संख्या में शिक्षक धरना स्थल पर पहुंचे और सरकार के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की। शिक्षकों का साफ कहना है कि लंबी सेवा के बाद उन पर टीईटी (TET) परीक्षा थोपना पूरी तरह अनुचित है और जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • नीलम पार्क में तीसरे दिन भी जारी रहा धरना: आंदोलन के तीसरे दिन ग्वालियर-चंबल संभाग के हजारों शिक्षक भोपाल पहुंचे। प्रांतीय आह्वान पर चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने में शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया।

  • टीईटी परीक्षा से मुक्ति की प्रमुख मांग: आंदोलनरत शिक्षकों की मुख्य मांग है कि आरटीई (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त किए गए वरिष्ठ शिक्षकों को टीईटी परीक्षा से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।

  • टीईटी फॉर्म न भरने का आह्वान: मोर्चा के संयोजक जगदीश यादव ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि 25-25 साल की सेवा दे चुके शिक्षकों की अब परीक्षा लेना किसी भी रूप में न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे टीईटी परीक्षा के फॉर्म न भरें और इस नियम का पुरजोर विरोध जारी रखें।

  • अन्य प्रमुख मांगें: टीईटी से छूट के अलावा, शिक्षकों द्वारा नियुक्ति दिनांक से वास्तविक सेवा अवधि की गणना करने, और स्कूलों में लागू की गई अव्यवहारिक ‘ई-अटेंडेंस’ की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है।

  • आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी न हों: मोर्चा के पदाधिकारियों (राकेश दुबे, राजेश नायक, डीके सिंगोर और राकेश पटेल आदि) ने दो टूक कहा कि यह लड़ाई केवल परीक्षा की नहीं, बल्कि शिक्षकों के सम्मान और उनके सेवा अधिकारों की है। जब तक शासन स्तर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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