अग्रसर इंडिया एक्सक्लूसिव | भोपाल
भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का बदलेगा नाम? कार्यपरिषद ने पास किया प्रस्ताव, स्वतंत्रता सेनानी ‘बरकतउल्ला’ की जगह ‘राजा भोज’ और ‘वाग्देवी’ पर रखने की तैयारी!
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इस वक्त की सबसे बड़ी और सियासी हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है। भोपाल के प्रतिष्ठित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) का नाम बदलने की तैयारी पूरी कर ली गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (Executive Council) ने यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का एक बेहद संवेदनशील और बड़ा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। अब इस यूनिवर्सिटी का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने की सिफारिश की गई है।
कार्यपरिषद द्वारा पास किया गया यह हाई-प्रोफाइल प्रस्ताव अब अंतिम मुहर के लिए उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जा रहा है, जिसके बाद अंतिम फैसला राज्य सरकार लेगी।
परियोजना की बड़ी बातें (HighLights):
-
बड़ा फैसला: बीयू (BU) की कार्यपरिषद ने यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से किया पारित।
-
नया नाम: ‘बरकतउल्ला विश्वविद्यालय’ से नाम बदलकर अब ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ रखने की है तैयारी।
-
अगला कदम: नाम बदलने का यह आधिकारिक प्रस्ताव अब उच्च शिक्षा विभाग और राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
राजा भोज बनाम मौलाना बरकतउल्ला: प्रस्ताव के पीछे दिए गए ये बड़े तर्क
यूनिवर्सिटी का नाम बदलने के पीछे कार्यपरिषद ने जो तर्क दिए हैं, उस पर आने वाले दिनों में बहस छिड़ना तय है। प्रस्ताव में कहा गया है कि किसी भी बड़े शैक्षणिक संस्थान का नाम उस क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और गौरव को दर्शाने वाला होना चाहिए।
-
मौलाना बरकतउल्ला पर तर्क: प्रस्ताव के मुताबिक, मौलाना बरकतउल्ला बेशक गदर पार्टी के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और विद्वान थे, लेकिन उनका अधिकांश जीवन विदेशों में बीता। राजा भोज की तुलना में भोपाल के सीधे विकास और सांस्कृतिक उत्थान में उनका कोई सीधा योगदान नजर नहीं आता।
-
राजा भोज और वाग्देवी का गौरव: वहीं दूसरी ओर, प्रतापी राजा भोज ने धार में महान ज्ञान केंद्र ‘भोजशाला’ (सरस्वती मंदिर/वाग्देवी) की स्थापना की थी। उन्होंने स्थापत्य और नगर नियोजन पर 80 से अधिक महान ग्रंथों की रचना की। भोपाल का ऐतिहासिक बड़ा तालाब और भोजपुर मंदिर राजा भोज की ही दूरदर्शिता का जीवंत प्रमाण हैं। इसलिए ‘वाग्देवी भोजपाल’ नाम शिक्षा के मंदिर के लिए सबसे सटीक है।
कौन थे मौलाना बरकतउल्ला भोपाली? जानिए इतिहास
इस विवाद और चर्चा के बीच मौलाना बरकतउल्ला के कद को छोटा नहीं आंका जा सकता:
भारत की पहली निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री: 7 जुलाई 1854 को भोपाल के इतवारा में जन्मे मौलाना बरकतउल्ला स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी नायक थे। वह ब्रिटिश शासन के इतने कट्टर विरोधी थे कि उन्होंने जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान में रहकर देश की आजादी के लिए अलख जगाई। साल 1915 में काबुल (अफगानिस्तान) में जब भारत की पहली निर्वासित सरकार बनी, तो मौलाना बरकतउल्ला को उसका प्रधानमंत्री बनाया गया था। उन्हीं के सम्मान में साल 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘बरकतउल्ला विश्वविद्यालय’ किया गया था।
अधिकारी का आधिकारिक बयान:
“कार्यपरिषद की बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से विश्वविद्यालय का नाम बदलने की अनुशंसा का प्रस्ताव पारित कर दिया गया है। इसे अग्रिम कार्यवाही के लिए भेज दिया गया है। नाम बदलने का अंतिम और वास्तविक निर्णय अब मध्य प्रदेश सरकार को ही लेना है।” — समर बहादुर सिंह, कुलसचिव (Registrar), बरकतउल्ला विश्वविद्यालय
मौसम अपडेट: इस बड़ी खबर के बीच मौसम विभाग ने भी चेतावनी जारी की है। मध्य प्रदेश के भोपाल और ग्वालियर समेत करीब 40 जिलों में अगले चार दिनों तक झमाझम बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।
(मध्य प्रदेश और शिक्षा जगत की हर बड़ी हलचल के लिए बने रहिए अग्रसर इंडिया के साथ।)




