एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / कृषि एवं ग्रामीण विकास डेस्क
भोपाल मास्टर प्लान-2047 के खिलाफ किसानों का उग्र प्रदर्शन: मुगालिया छाप से पदयात्रा निकाल रहे किसानों को नीलबड़ तिराहे पर रोका, सड़क पर बैठकर किया धरना-प्रदर्शन
भोपाल: भोपाल विकास योजना-2047 के नए ड्राफ्ट के विरोध में ग्रामीण इलाकों के किसानों का गुस्सा गुरुवार को सड़कों पर फूट पड़ा। मास्टर प्लान के तहत कृषि भूमि को फॉरेस्ट, रिवरफ्रंट और ग्रीन बेल्ट जैसी आरक्षित श्रेणियों में शामिल किए जाने के खिलाफ सैकड़ों किसानों ने मुगालिया छाप से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) कार्यालय की ओर पदयात्रा निकाली। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने नीलबड़ तिराहे पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया, जिसके विरोध में किसान दोपहर से शाम तक बीच सड़क पर धरने पर बैठे रहे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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किसानों का उग्र विरोध और धरना: मुगालिया छाप से शुरू हुई इस पदयात्रा को पुलिस ने नीलबड़ तिराहे पर रोक लिया, जिससे नाराज किसान सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और दोपहर से लेकर करीब 3:30 बजे तक जमकर नारेबाजी की।
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प्रमुख मांगें और आरोप:
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किसान नेताओं (अनोखी सिंह पटेल, विनोद पाटीदार और मनोहर सिंह ठाकुर) का आरोप है कि नए मास्टर प्लान में भोपाल और सीहोर के 66 गांवों की उपजाऊ कृषि भूमि का लैंडयूज मनमाने ढंग से बदल दिया गया है, जिससे उनकी आजीविका खतरे में पड़ गई है।
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किसानों ने मांग की है कि भोजताल संरक्षण जोन-1 और जोन-2 के कड़े प्रतिबंधों को हटाया जाए और जमीन का भू-उपयोग केवल कृषि के लिए रखा जाए।
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दावे-आपत्तियां दर्ज कराने की समय-सीमा एक माह और बढ़ाने तथा निर्णय लेने से पहले प्रभावित गांवों में अनिवार्य रूप से ग्रामसभाएं आयोजित करने की मांग उठाई गई।
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प्रशासन का पक्ष: प्रदर्शन स्थल पर पहुंची TNCP की सहायक संचालक इंदू त्रिपाठी ने किसानों से चर्चा कर उनके ज्ञापन और आवेदन लिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि नियमों के तहत सभी आपत्तियों को पोर्टल पर डिजिटाइज किया जा रहा है और सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को उचित अवसर दिया जाएगा।




