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भोपाल में रियाज मंजिल, नानी की हवेली सहित शत्रु संपत्तियों की होगी नीलामी, मुख्य सचिव ने की बैठक

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल में शत्रु संपत्तियों की नीलामी की तैयारी तेज: मुख्य सचिव ने 31 अक्टूबर तक मूल्यांकन पूरा करने के दिए निर्देश; रियाज मंजिल और नानी की हवेली भी सूची में शामिल

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित शत्रु संपत्तियों (Enemy Properties) की पहचान, सत्यापन और उनके मूल्यांकन की प्रक्रिया अब और तेज कर दी गई है। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल की अध्यक्षता में हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा भी शामिल हुए। प्रशासन को इन संपत्तियों का जल्द से जल्द मूल्यांकन कर रिपोर्ट सौंपने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 31 अक्टूबर तक मूल्यांकन पूरा करने के निर्देश: मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को भोपाल में स्थित सभी शत्रु संपत्तियों की अद्यतन सूची तैयार कर आगामी 31 अक्टूबर तक मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

  • बाजार और पंजीयन दरों से होगा मिलान: संपत्तियों का मूल्यांकन प्रचलित बाजार दरों (Market Rates) और जिला पंजीयन कार्यालय (Registrar Rates) की गाइडलाइन दरों का मिलान करके किया जाएगा। इसके पश्चात, रिकॉर्ड की समीक्षा कर नियमानुसार इनकी नीलामी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

  • सूची में शामिल प्रमुख संपत्तियां: प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, भोपाल में जिन प्रमुख शत्रु संपत्तियों की जानकारी जुटाई जा रही है, उनमें रियाज मंजिल, दो बड़े होटल, नानी की हवेली, फ्लैग स्टाफ और बहार मंजिल जैसी संपत्तियां शामिल हैं।

  • राजस्व अभिलेखों की सूक्ष्म जांच: प्रशासन को इन संपत्तियों के राजस्व अभिलेखों, मौके की वर्तमान स्थिति और उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों का सूक्ष्म परीक्षण करने को कहा गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संपत्ति ‘शत्रु संपत्ति’ की श्रेणी में आती है या ‘निष्क्रांत संपत्ति’ (Evacuee Property) में।

  • डिजिटलीकरण और ई-मैपिंग पर जोर: बैठक में शत्रु संपत्तियों के डिजिटलीकरण, ई-मैपिंग और रिमोट सेंसिंग के जरिए डेटा तैयार करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संपत्तियों पर अतिक्रमण, मौजूदा विवादों और नीलामी की संभावनाओं का पूरा ब्योरा जुटाया जा रहा है। राजस्व रिकॉर्ड में इन संपत्तियों को नियमानुसार ‘कस्टोडियन ऑफ़ एनीमी प्रॉपर्टी फॉर इंडिया’ (Custodian of Enemy Property for India) के नाम दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

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