एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / स्वास्थ्य डेस्क
कोरोना योद्धाओं का अनोखा और आक्रोशित विरोध: बहाली की मांग को लेकर भोपाल के नीलम पार्क में 11 दिन से बैठे आयुष चिकित्सक, पुरुष कर्मचारियों ने किया अर्धनग्न प्रदर्शन तो महिलाओं ने पहनी पीपीई किट
भोपाल: कोरोना महामारी के सबसे डरावने दौर में अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात मरीजों की सेवा करने वाले आयुष चिकित्सकों और पैरामेडिकल कर्मचारियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। नौकरी से हटाए जाने के बाद अपनी पुनर्बहाली की मांग को लेकर भोपाल के नीलम पार्क में पिछले 11 दिनों से धरने पर बैठे इन स्वास्थ्यकर्मियों ने गुरुवार को प्रशासन और सरकार के खिलाफ अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान पुरुष स्वास्थ्यकर्मी अर्धनग्न होकर धरने पर बैठे, जबकि महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने महामारी के दौर की याद दिलाते हुए पीपीई किट पहनकर अपना रोष व्यक्त किया।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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11 दिनों से जारी है अनिश्चितकालीन धरना: मध्य प्रदेश कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के बैनर तले भोपाल के नीलम पार्क में पिछले 11 दिनों से स्वास्थ्यकर्मी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार द्वारा सुध न लिए जाने के कारण अब आंदोलन उग्र रूप लेता जा रहा है।
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पीपीई किट और अर्धनग्न प्रदर्शन: गुरुवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पुरुष कर्मचारियों ने अर्धनग्न होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, वहीं महिला कर्मचारियों ने पीपीई (PPE) किट पहनकर सरकार को उस कठिन समय की याद दिलाई जब उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर जनता की रक्षा की थी। इससे पहले ये कर्मचारी अपनी डिग्रियां तक सांकेतिक रूप से जलाकर अपना दर्द बयां कर चुके हैं।
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कोरोना काल में दी थी सेवाएं: मध्य प्रदेश कोविड-19 आयुष चिकित्सक संघ के प्रदेश संयोजक डॉ. अंकित असाटी ने बताया कि महामारी के समय जब हर कोई घरों में दुबका हुआ था, तब इन स्वास्थ्यकर्मियों ने 45 डिग्री चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में भी पीपीई किट पहनकर लगातार 10 से 12 घंटे ड्यूटी की थी। उस वक्त सरकार और समाज ने इन्हें ‘कोरोना योद्धा’ और भगवान का दर्जा दिया था, लेकिन महामारी का खतरा टलते ही बजट की कमी का हवाला देकर इन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
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संविदा पर बहाली की मांग: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एनएचएम (NHM) के तहत 23 मार्च 2020 को जिला स्वास्थ्य समितियों द्वारा मेरिट के आधार पर ये अस्थायी नियुक्तियां की गई थीं। अब उनकी मांग है कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत रिक्त पड़े पदों पर इन्हीं अनुभवी कोरोना योद्धाओं को संविदा पर समायोजित किया जाए, जिससे न केवल उनका रोजगार सुरक्षित होगा बल्कि ग्रामीण अंचलों की चरमराई स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहतर हो सकेंगी।




