एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / प्रशासन एवं रियल एस्टेट डेस्क
भोपाल में संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर का बड़ा कमाल: प्रॉपर्टी की होगी जियो टैगिंग, गूगल मैप पर दिखेगी वास्तविक स्थिति; स्टांप चोरी और फर्जीवाड़े पर कसेगा शिकंजा
भोपाल: राजधानी में जमीन या मकान की खरीद-फरोख्त करने वालों के लिए बड़ी खबर है। अब लोकेशन छिपाकर स्टांप ड्यूटी में हजारों-लाखों रुपये की हेराफेरी करने वालों का खेल पूरी तरह बंद होने जा रहा है। मुख्य सड़क या कॉर्नर की प्रॉपर्टी को गली के अंदर का बताकर कम स्टांप शुल्क पर रजिस्ट्री कराने के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए पंजीयन विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। विभाग ने जिले की कलेक्टर गाइडलाइन की सभी 4,113 लोकेशन की जियो टैगिंग कर उन्हें हाई-टेक ‘संपदा 2.0’ सॉफ्टवेयर से जोड़ दिया है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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गूगल मैप पर खुलेगी प्रॉपर्टी की पूरी कुंडली: जियो टैगिंग के बाद अब भोपाल जिले की हर प्रॉपर्टी की एक विशिष्ट आईडी (Unique ID) होगी। गूगल मैप के माध्यम से यह आसानी से पता चल सकेगा कि संबंधित प्लॉट या मकान कॉर्नर का है या बीच में, मुख्य सड़क पर स्थित है या किसी अंदरूनी गली में, और उसका मुख किस दिशा में है। नगर निगम सीमा के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की प्रॉपर्टी को भी इस डिजिटल व्यवस्था में शामिल किया गया है।
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स्टांप ड्यूटी का फर्जीवाड़ा होगा खत्म: अक्सर लोग कम गाइडलाइन वैल्यू वाले पते दिखाकर रजिस्ट्री करा लेते थे, जिससे शासन को राजस्व का चूना लगता था। अब संपदा 2.0 सॉफ्टवेयर और गूगल मैप की मैपिंग के कारण लोकेशन बदलकर रजिस्ट्री कराने की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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मालिक का नाम और टैक्स की जानकारी एक क्लिक पर: रजिस्ट्री के दौरान जैसे ही प्रॉपर्टी की आईडी दर्ज की जाएगी, वर्तमान मालिक का नाम स्क्रीन पर आ जाएगा। इससे संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व की पुष्टि होने के साथ-साथ नगर निगम को बकाया संपत्ति कर (प्रॉपर्टी टैक्स) वसूलने में भी बड़ी आसानी होगी।
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वरिष्ठ जिला पंजीयक का बयान: इस संबंध में वरिष्ठ जिला पंजीयक स्वप्नेश शर्मा ने बताया कि कलेक्टर गाइडलाइन की सभी लोकेशनों की जियो टैगिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। इस नई पारदर्शी व्यवस्था से न केवल रजिस्ट्री में होने वाले फर्जीवाड़े पर लगाम लगेगी, बल्कि खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए स्टांप ड्यूटी की सही गणना करना बेहद आसान हो जाएगा।




