एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / पर्यावरण एवं शहर डेस्क
गणेश प्रतिमा विसर्जन से भोपाल के जलस्रोतों पर गंभीर असर: शाहपुरा झील में टीडीएस 86% बढ़ा, हथाईखेड़ा डैम में जैविक प्रदूषण दोगुना; एमपीपीसीबी की जांच में खुलासा
भोपाल: राजधानी भोपाल में गणेश प्रतिमा विसर्जन के बाद शहर के प्रमुख जलस्रोतों (झीलों और बांधों) की पानी की गुणवत्ता पर काफी बुरा असर पड़ा है। मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) द्वारा विसर्जन से पहले, दौरान और बाद में लिए गए पानी के नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक रंग, प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और पानी में प्रवाहित की जाने वाली पूजन सामग्री के कारण पानी में टीडीएस (TDS) और जैविक प्रदूषण (BOD) का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है, जबकि जलीय जीवों के लिए जरूरी घुलित ऑक्सीजन (DO) घट गई है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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पांच प्रमुख निगरानी स्थल: एमपीपीसीबी ने हथाईखेड़ा डैम, लोअर लेक के खटलापुरा घाट, अपर लेक के प्रेमपुरा घाट, शाहपुरा झील और लोअर लेक के रानी कमलापति घाट से 10 सितंबर (विसर्जन पूर्व), 25 सितंबर (विसर्जन के दौरान) और 30 सितंबर (विसर्जन के बाद) को पानी के नमूने एकत्र किए थे।
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शाहपुरा झील में टीडीएस में भारी उछाल: शाहपुरा झील में कुल घुलित ठोस पदार्थ (TDS) का स्तर विसर्जन से पहले 398 मिलीग्राम प्रति लीटर था, जो विसर्जन के बाद बढ़कर 742 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। यह पांचों स्थलों में सबसे बड़ी वृद्धि (लगभग 86%) है।
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हथाईखेड़ा डैम में जैविक प्रदूषण (BOD) दोगुना से ज्यादा: जैविक प्रदूषण के मुख्य संकेतक ‘बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड’ (BOD) में सबसे अधिक 114% से ज्यादा की वृद्धि हथाईखेड़ा डैम में दर्ज की गई। यहाँ इसका स्तर 2.8 से बढ़कर 6 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुँच गया।
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जलीय जीवों के लिए घट गई ऑक्सीजन: पानी में घुली ऑक्सीजन (DO) का स्तर सभी पांचों स्थलों पर कम हुआ है। शाहपुरा झील में यह 6.3 से घटकर 5.1 मिलीग्राम प्रति लीटर, खटलापुरा में 6.4 से 5.4 और प्रेमपुरा घाट पर 6 से घटकर 5.1 मिलीग्राम प्रति लीटर रह गया। ऑक्सीजन की यह कमी जलीय जीवों के जीवन के लिए बेहद प्रतिकूल स्थिति पैदा करती है।
विभिन्न स्थलों पर टीडीएस (TDS) और बीओडी (BOD) की स्थिति
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खटलापुरा घाट: टीडीएस 376 से बढ़कर 476 mg/L हुआ; बीओडी 2.3 से बढ़कर 4 mg/L हुआ।
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प्रेमपुरा घाट: टीडीएस 226 से बढ़कर 304 mg/L हुआ; बीओडी 2.7 से बढ़कर 3 mg/L हुआ।
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रानी कमलापति घाट: टीडीएस 384 से बढ़कर 428 mg/L हुआ; बीओडी 3 से बढ़कर 3.5 mg/L हुआ।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि मूर्तियों के विसर्जन से जुड़े इन पर्यावरणीय प्रभावों से बचने के लिए भविष्य में कृत्रिम टैंकों के उपयोग और पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने पर कड़ाई से अमल करने की आवश्यकता है।




