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‘देश के 60 लाख आंगनबाड़ी वर्कर, आशा और रसोइयों को मिले पक्की नौकरी’ भोपाल में जुटे 18 राज्यों ने बुलंद की आवाज

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल घोषणा पत्र जारी: बच्चों के पोषण अधिकारों पर आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में उठी मांग—आधार या तकनीकी दिक्कतों से वंचित न हों बच्चे, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिले कर्मचारी का दर्जा

भोपाल: राजधानी के आईकफ आश्रम में बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार पर आयोजित तीन दिवसीय तीसरे राष्ट्रीय अधिवेशन का समापन हो गया है। अधिवेशन के अंतिम दिन ‘भोपाल घोषणा पत्र’ जारी किया गया, जिसमें बच्चों के अधिकारों, आंगनबाड़ी और मिड-डे मील व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण और कड़े निर्णय लिए गए हैं। सम्मेलन में देश के 18 राज्यों से आए 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • आधार या तकनीकी दिक्कतों से बच्चों को न किया जाए वंचित: घोषणा पत्र में प्रमुख रूप से मांग की गई है कि आधार कार्ड न होने या किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा के कारण देश के किसी भी बच्चे को आंगनबाड़ी सेवाओं, मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal), छात्रवृत्ति और अन्य बुनियादी अधिकारों से वंचित न किया जाए। इसके अलावा बच्चों के लिए फेस रिकग्निशन, ई-केवाईसी और अनिवार्य ऐप जैसी जटिल व्यवस्थाओं को बंद करने की मांग की गई है।

  • ‘आंगनबाड़ी ठीक करो’ अभियान का ऐलान: अधिवेशन में राष्ट्रीय स्तर पर ‘आंगनबाड़ी ठीक करो’ अभियान चलाने, विभिन्न राज्यों में ऐसे ही अधिवेशन आयोजित करने और साझा कार्रवाई करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया।

  • 60 लाख से अधिक महिला कर्मियों को मिले कर्मचारी का दर्जा: सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि देश की 27 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाएं, 10 लाख आशा कार्यकर्ता और 25 लाख रसोइया (कुल 60 लाख से अधिक महिलाएं) जो महत्वपूर्ण सेवाएं दे रही हैं, उन्हें मात्र ‘स्वयंसेवक’ मानकर श्रम कानूनों के संरक्षण से वंचित रखा जा रहा है। सरकार से मांग की गई कि इन सभी महिलाओं को आधिकारिक रूप से कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

  • भोजन के निजीकरण पर रोक और स्थानीय पौष्टिक आहार: आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में निजी कंपनियों के दखल व व्यावसायीकरण पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई। इसके स्थान पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री से ही बच्चों को ‘गर्म पका हुआ भोजन’ उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।

  • दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी: इस राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ आंगनबाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स की महासचिव एआर सिंधु और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा सहित कई प्रमुख वक्ता व प्रतिनिधि शामिल हुए।

  • अन्य प्रमुख मांगें:

    • आईसीडीएस (ICDS) और पीएम पोषण योजना का प्रभावी सोशल ऑडिट कराया जाए।

    • आदिवासी और दूरदराज के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाई जाएं।

    • स्कूलों के 200 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगे।

    • स्कूलों में किचन गार्डन विकसित किए जाएं।

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