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वंदे भारत की रफ्तार पर मवेशी लगा रहे ब्रेक, बार-बार टकराने की घटनाओं से रेलवे और यात्री परेशान

 

वंदे भारत ट्रेन से बार-बार मवेशी टकराने की घटनाओं से रेलवे को नुकसान हो रहा है। वहीं यात्रियों को भी परेशानी का सामना उठाना पड़ता है क्योंकि वे समय पर अपने स्टेशन पर नहीं पहुंच पाते। ऐसे में रेलवे अब उन स्थानों पर फोकस कर रहा है, जहां ट्रेन से मवेशियों के टकराने की घटनाएं सबसे ज्यादा हो रही हैं।

Indian Railway: वंदे भारत की रफ्तार पर मवेशी लगा रहे ब्रेक, बार-बार टकराने की घटनाओं से रेलवे और यात्री परेशान

 

भोपाल। हाई-स्पीड ट्रेनों, खासकर वंदे भारत, ने देश में रेल यात्रा की रफ्तार जरूर बढ़ाई है, लेकिन ट्रैक सुरक्षा की कमजोरियां अभी भी रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ग्रामीण इलाकों में मवेशियों के अचानक ट्रैक पर आ जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

इससे वंदे भारत ट्रेन का न सिर्फ इंजन डैमेज और देरी जैसी समस्याएं खड़ी होती हैं, बल्कि पूरी रूट की कई ट्रेनें प्रभावित हो जाती हैं। यात्री महंगा किराया चुकाकर सफर तो करते हैं, लेकिन समय पर गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते। दूसरी ओर, रेलवे को भी हर वर्ष करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।

 

हल्की टक्कर में भी इंजन को पहुंचता है नुकसान

पिछले कुछ वर्षों में मवेशी-टक्कर की सैकड़ों घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए अभी स्थायी सुरक्षा समाधान पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है। वंदे भारत जैसी तेज ट्रेनों के लिए ये घटनाएं और भी गंभीर हैं, क्योंकि हल्की सी टक्कर भी इनके इंजन और फ्रंट हिस्से को नुकसान पहुंचा देती हैं। 2022-23 में 538, 2024-25 में 101 और 2025 में अब तक 12 मवेशी-टक्कर की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

रेलवे ने चिह्नित किए संवेदनशील स्पाट

रेलवे ने ऐसे सभी संवेदनशील स्पाट चिह्नित कर लिए हैं, जहां इन घटनाओं की संख्या अधिक थी। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रैक के दोनों ओर सुरक्षा बाउंड्री बनाने का काम तेज़ी से चल रहा है। कोटा सेक्शन में यह काम पूरा हो चुका है, जबकि भोपाल और जबलपुर क्षेत्रों में कार्य जारी है। उम्मीद है कि बाउंड्री वाल तैयार होने के बाद हाई-स्पीड ट्रेनों के सामने अचानक मवेशी आने की घटनाएं काफी कम हो जाएंगी।

एक घंटे का समय होता है बर्बाद

मवेशी से टक्कर होने के बाद ट्रेन की देरी नुकसान की गंभीरता पर निर्भर करती है। मामूली डैमेज होने पर तकनीकी टीम 10–15 मिनट में समस्या ठीक कर देती है। लेकिन यदि इंजन का फ्रंट हिस्सा टूट जाए, तो इंजन बदलने में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग जाता है। इसका असर सिर्फ एक ट्रेन पर नहीं बल्कि पूरे रूट की ट्रेनों पर पड़ता है।

रेलवे की अपील

रेलवे ने ग्रामीणों और किसानों से भी अपील की है कि वे अपने मवेशियों को ट्रैक के आसपास न छोड़ें और चराई के लिए सुरक्षित स्थानों का ही उपयोग करें। गेटमैन और ट्रैकमैन को निर्देश दिए गए हैं कि यदि असामान्य गतिविधि दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें, ताकि घटना को समय रहते रोका जा सके।

वंदे भारत की रफ्तार

वंदे भारत 2.0 में उन्नत तकनीक है और यह 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार केवल 52 सेकंड में पकड़ लेती है। इसकी अधिकतम गति 180 किमी/घंटा है। ऐसे में ट्रैक सुरक्षा रेलवे के लिए प्राथमिकता बनना जरूरी है, ताकि हाई-स्पीड ट्रेनें बिना बाधा सुरक्षित और समय पर अपनी मंजिल तक पहुंच सकें।

ट्रैक के दोनों तरफ बाउंड्री बनाई जाएगी

मवेशी-टक्कर को रोकने के लिए रेलवे लगातार प्रयास कर रहा है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है, जहां दुर्घटनाएं सबसे अधिक होती हैं। इन संवेदनशील इलाकों में ट्रैक के दोनों तरफ सुरक्षा बाउंड्री बनाई जा रही है। इसका अधिकांश हिस्सा कोटा में पूरा हो चुका है, जबकि भोपाल और जबलपुर में यह कार्य अभी जारी है। – हर्षित श्रीवास्तव, सीपीआरओ, जबलपुर

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