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भोपाल के कारोबारी की संपत्ति हड़प कर 3 करोड़ का चूना लगाने वाले इंदौर के दुबे परिवार पर FIR

 

आरोपितों पर पीड़ित की संपत्तियों को इंदौर में गिरवी रखवाकर बैंक से 3 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट प्राप्त करने और उस राशि का निजी स्वार्थ में दुरुपयोग …और पढ़ें

 

भोपाल के कारोबारी की संपत्ति हड़प कर 3 करोड़ का चूना लगाने वाले इंदौर के दुबे परिवार पर FIR

चूना लगाने वाले इंदौर के दुबे परिवार पर FIR, AI Generated Image

HighLights

  1. EOW भोपाल ने 3 करोड़ की धोखाधड़ी में इंदौर के केमिकल व्यापारी पर की कार्रवाई
  2. साजिश के तहत पीड़ित की संपत्ति गिरवी रख निकाली क्रेडिट लिमिट, फिर हुए फरार
  3. फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर की गई लोन की राशि, पीड़ित की संपत्तियां नीलामी की कगार पर

भोपाल। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल ने करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और जालसाजी के एक बड़े मामले को लेकर बुधवार को कार्रवाई की। ईओडब्ल्यू ने भोपाल के कारोबारी दीपक भावसार की शिकायत पर इंदौर के कैमिकल व्यापारी राहुल दुबे, उनकी पत्नी संगीता दुबे, पिता प्रताप नारायण दुबे, भाई अतुल दुबे और मैनेजर भुवनेश्वर पाण्डे सहित आधा दर्जन आरोपितों के विरुद्ध आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचना का मामला दर्ज किया है। आरोपितों पर पीड़ित की संपत्तियों को इंदौर में गिरवी रखवाकर बैंक से 3 करोड़ रुपये की क्रेडिट लिमिट प्राप्त करने और उस राशि का निजी स्वार्थ में दुरुपयोग करने का आरोप है।

गिरवी रखवा दीं भोपाल की कीमती संपत्तियां

जांच में सामने आया कि यह पूरी साजिश वर्ष 2017 में शुरू हुई थी। आरोपितों ने शिकायतकर्ता दीपक भावसार को व्यापार में लाभ और वेतन का लालच देकर विश्वास में लिया और स्पेक्ट्रो फर्टिकेम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का गठन किया। योजनाबद्ध तरीके से पीड़ित को कंपनी में डायरेक्टर बनाया गया और उनकी भोपाल स्थित तीन कीमती संपत्तियों (एक फ्लैट, दुकान और ग्राम मेण्डोरी की भूमि) को पंजाब नेशनल बैंक, सियागंज इंदौर में को-लेटरल सिक्योरिटी के रूप में गिरवी रखवा दिया गया। इसके आधार पर कंपनी के नाम पर 3 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर कराई गई।

 

व्यावसायिक निवेश के बजाय निजी खातों में किया हेरफेर

ईओडब्ल्यू की जांच में वित्तीय हेराफेरी के चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। बैंक से ऋण राशि प्राप्त होते ही आरोपितों ने इसे व्यावसायिक उद्देश्य में लगाने के बजाय अपनी पारिवारिक और निष्क्रिय कंपनियों में स्थानांतरित कर अपने निजी खाते में ले लिया। जांच के अनुसार, लगभग 2.81 करोड़ रुपये की राशि डीडी सुपर बायो आर्गेनिक, डीडी केमिकल्स, स्वाति एंजिकेम, मृत्युंजय केमटे, अमाया एजेंसी, रिधिमा ऑर्गेनिक और महाकाल केमिकल जैसी फर्मों के खातों में भेजी गई। इनमें से चार कंपनियां अस्तित्वहीन थीं या उनमें कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं हो रही थी। अकेले डीडी सुपर बायो ऑर्गेनिक में ही 2.06 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।

जाली हस्ताक्षर कर निकाला कार लोन, अब नीलामी की कगार पर संपत्तियां

आरोपितों ने पीड़ित के जाली हस्ताक्षर कर बोर्ड रेजोल्यूशन भी तैयार किए। जांच में पाया गया कि 18.50 लाख रुपये का कार लोन लेने के लिए दीपक भावसार के संदिग्ध हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया था। इस संबंध में न तो कोई बैठक आयोजित की गई और न ही पीड़ित को इसकी जानकारी दी गई। ऋण राशि का बंदरबांट करने के बाद आरोपितों ने कंपनी का संचालन बंद कर दिया और फरार हो गए। बैंक की किस्त जमा न होने के कारण अब पीड़ित की संपत्तियां नीलामी की स्थिति में पहुंच गई हैं।

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