एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) राज्य ब्यूरो / भोपाल डेस्क
मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून का असर: 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश; धान और सोयाबीन का रकबा घटने से कृषि उत्पादन और कर वसूली प्रभावित होने की आशंका
भोपाल: मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की बेरुखी का व्यापक असर कृषि उत्पादन के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यस्था पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश के 30 जिलों में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण खरीफ फसलों के रकबे और कुल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विभाग के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार, इस बार खरीफ फसलों के कुल उत्पादन में करीब 4 लाख टन की कमी आने की संभावना है, जिसका सीधा असर राज्य के वित्तीय राजस्व और कर वसूली पर भी पड़ सकता है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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रकबे में भारी गिरावट: सरकार ने इस वर्ष 150.45 लाख हेक्टेयर में बोवनी का लक्ष्य रखा था, जो घटकर 144.92 लाख हेक्टेयर ही रह गया। कमजोर मानसून के चलते लगभग चार लाख हेक्टेयर में धान और सोयाबीन की कम बोवनी हुई है।
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प्रमुख फसलों के आंकड़े:
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धान: इस बार धान का रकबा 40 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का अनुमान था, लेकिन यह गिरकर 36.65 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया।
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सोयाबीन: सोयाबीन का रकबा इस साल 52.60 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल (2025 में) यह 54.70 लाख हेक्टेयर था। हालांकि, मालवांचल में सोयाबीन का उत्पादन ठीक रहने का अनुमान है।
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विकल्प के तौर पर बोई गई फसलों पर असर: जिन इलाकों में धान की बोवनी नहीं हो पाई, वहां किसानों ने मक्का या उड़द की खेती की। हालांकि, पानी की कमी के चलते इन फसलों की फलियों में दाने कमजोर रह गए हैं। कुल खरीफ उत्पादन 328 लाख टन रहने की संभावना है, जो पिछले वर्ष के 332.12 लाख टन से कम है।
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कर वसूली और राजस्व पर चिंता: कृषि उत्पादन घटने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गति धीमी होने के कारण वित्त विभाग ने राज्य के स्वयं के करों से मिलने वाले 1,17,667 करोड़ रुपये के अनुमानित राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका जताई है, क्योंकि पैदावार कम होने से बाजार में नकदी का प्रवाह प्रभावित होता है।




