एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / पर्यावरण एवं प्रशासन डेस्क
केरवा जलाशय एनजीटी जांच: नियमों की अनदेखी और अवैध निर्माण के 19 मामले आए सामने, एफटीएल और ग्रीन बेल्ट में निर्माण का खुलासा
भोपाल: राजधानी भोपाल के केरवा जलाशय के आसपास नियमों को ताक पर रखकर किए गए निर्माण कार्यों और भूमि उपयोग में बदलाव के मामलों पर शिकंजा कसता जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के तहत गठित उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने 22 अक्टूबर को मौके पर पहुंचकर जलाशय के फुल टैंक लेवल (FTL), डूब क्षेत्र और कथित अतिक्रमणों का भौतिक सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट में एफटीएल के भीतर रिटेनिंग वॉल, ग्रीन बेल्ट में कृत्रिम तालाब, व्यावसायिक निर्माण और बाटनिकल गार्डन की आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े 19 मामले दर्ज किए गए हैं, जिन्हें 29 अक्टूबर को होने वाली एनजीटी की सुनवाई में पेश किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
जांच में इन प्रमुख मामलों का खुलासा:
-
मेंडोरा: बाटनिकल गार्डन की आरक्षित भूमि पर रेस्टोरेंट का निर्माण, एफटीएल के पास रिटेनिंग वॉल और पक्के कमरों का निर्माण दर्ज किया गया है। साथ ही रेस्ट हाउस के पास नए पिलर बनाने के लिए पेड़ काटने की बात भी सामने आई है।
-
निशा डागा का मामला: 0.93 हेक्टेयर भूमि पर लगातार मिट्टी का भराव और निर्माण कार्य जारी रहने का उल्लेख है।
-
सूर्यवंशी बंधु: ग्रीन बेल्ट क्षेत्र के भीतर कृत्रिम तालाब का निर्माण दर्ज किया गया है।
-
पीजेपी एस्टेट (बरखेड़ी बाज्याफ्त): बाटनिकल गार्डन की जमीन पर रिटेनिंग वॉल और पक्की आरसीसी सड़कें बनाई गई हैं।
-
मुल्ला जी की टेकरी: बफर और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र में तीन परतों वाली भारी दीवार और बंगले का निर्माण पाया गया है।
-
महुआखेड़ा: एनजीटी के पूर्व आदेश (4 फरवरी 2026) के बावजूद मौके से मिट्टी का अवैध भराव नहीं हटाए जाने की पुष्टि हुई है।
-
-
सीमा स्तंभ (मुनारे) गायब और प्राकृतिक बहाव प्रभावित: जांच के दौरान कई स्थानों पर डैम की सीमा दर्शाने वाले मुनारे गायब मिले हैं। मित्तूखेड़ी में जलाशय को पानी पहुंचाने वाले प्राकृतिक नाले पर कंक्रीट संरचना बनाए जाने से पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है।
-
29 अक्टूबर की सुनवाई होगी अहम: इससे पहले शुरुआती सर्वे में 33 कथित अतिक्रमण (18 सरकारी और 15 निजी जमीन पर) सामने आए थे, जिसके बाद अब नए भौतिक सत्यापन में 19 मामलों को सूचीबद्घ किया गया है। अब आगामी 29 अक्टूबर को एनजीटी में पेश होने वाली इस रिपोर्ट के आधार पर दोषी भू-स्वामियों और अतिक्रमणकारियों पर कड़ी कार्रवाई की उम्मीद है।




