एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में खुले सेप्टिक टैंक और बोरवेल हादसों पर सख्त हुई सरकार, अब लापरवाह अधिकारियों पर होगी बर्खास्तगी की कार्रवाई
भोपाल : मध्य प्रदेश में अब खुले सेप्टिक टैंक या बोरवेल के कारण होने वाले हादसों को लेकर राज्य सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार, भविष्य में ऐसी कोई भी दुर्घटना होने पर जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन से लेकर सीधे बर्खास्तगी तक की बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कड़ा रुख: ओंकारेश्वर में हुई दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिराने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
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बर्खास्तगी तक का प्रविधान: दुर्घटनाओं में लापरवाही बरतने वाले अमले को पहले निलंबित किया जाएगा और विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
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पहले भी हुए कई हादसे: ओंकारेश्वर से पहले बैतूल (मुलताई) और जबलपुर में भी ऐसे असुरक्षित सेप्टिक टैंकों के कारण मासूम बच्चों और मजदूरों की जान जा चुकी है।
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गाइडलाइन के बावजूद लापरवाही: शासन द्वारा सेप्टिक टैंक और बोरवेल खुले न छोड़ने की सख्त हिदायत और गाइडलाइन होने के बावजूद मैदानी स्तर पर सख्ती न होना आमजन के लिए जानलेवा साबित हो रहा है।
हालिया प्रमुख हादसे (एक नजर में)
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ओंकारेश्वर (25 जुलाई 2026): ब्रह्मपुरी पार्किंग क्षेत्र में नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाने के दौरान खुला छोड़ा गया सेप्टिक टैंक नागपुर के तीन वर्षीय मासूम (तनुष) के लिए काल बन गया, जिसमें गिरने से उसकी मौत हो गई। इस मामले में नगरीय प्रशासन आयुक्त द्वारा उप यंत्री सुरेश चंद्र पाटीदार को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
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बैतूल (10 जून 2026): मुलताई थाना क्षेत्र के परमंडल में सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग निकालते समय जहरीली गैस से दम घुटने के कारण दो सगे भाइयों (संजय और विजय पंवार) की दर्दनाक मौत हो गई थी।
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जबलपुर (26 अक्टूबर 2025): अस्पताल परिसर में बने एक खुले सेप्टिक टैंक में खेलते समय गिर जाने से दो सगे मासूम भाइयों की डूबने से जान चली गई थी।
प्रशासन का पक्ष
मप्र नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के सहायक संचालक सर्वेंद्र पांडेय के अनुसार, सरकार भारत सरकार की ‘नमस्ते योजना’ पर बेहद प्रभावी रूप से कार्य कर रही है। इसके तहत सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक हाथ से सफाई को पूरी तरह समाप्त कर सफाई व्यवस्था केवल मशीनीकरण के जरिए कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेप्टिक टैंकों से होने वाले हादसों को रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी गई है और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान लागू है।




