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MP में 30 करोड़ की ग्रेच्युटी हड़पने का खेल, चुपचाप बदलीं 108 एम्बुलेंस के 7 हजार कर्मियों की आईडी

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)

भोपाल / स्वास्थ्य एवं श्रम डेस्क

मध्य प्रदेश 108 एम्बुलेंस सेवा में बड़ा विवाद: आईडी बदलने से 7,000 कर्मचारियों की 30 करोड़ की ग्रेच्युटी पर संकट; हर कर्मचारी के अटक रहे 60 हजार रुपये

भोपाल: मध्य प्रदेश में संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारियों के साथ कथित धोखे और मनमानी का मामला सामने आया है। एजेंसी द्वारा कर्मचारियों की एम्प्लाई आईडी में अचानक बदलाव किए जाने के कारण प्रदेशभर के करीब 7,000 कर्मचारियों की ग्रेच्युटी का पैसा डूबने के कगार पर पहुंच गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी ने ग्रेच्युटी की देनदारी से बचने के लिए यह साजिश रची है, जिससे कुल मिलाकर लगभग 30 करोड़ रुपये की ग्रेच्युटी पर संकट खड़ा हो गया है। नाराज कर्मचारियों ने इस संबंध में भोपाल सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी है।

प्रमुख बिंदु (Highlights)

  • 7,000 कर्मचारियों की ग्रेच्युटी पर संकट: प्रदेश के 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े ये सभी कर्मचारी अपने 5 साल की सेवा पूरी करने वाले थे, जिसके बाद नियमानुसार प्रत्येक कर्मचारी को लगभग 60,000 रुपये ग्रेच्युटी के रूप में मिलने थे। लेकिन एजेंसी द्वारा छह महीने पहले चुपचाप आईडी बदले जाने से उनकी पूरी सेवा अवधि पर असर पड़ गया है।

  • जानबूझकर आईडी बदलने का आरोप: कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एजेंसी ने कंपनी बदलने का हवाला देकर उनकी पुरानी ‘ई-सीरीज’ वाली एम्प्लाई आईडी को बदलकर ‘एमपीईएस-सीरीज’ में तब्दील कर दिया। उदाहरण के लिए— आशीष वर्मा की पुरानी आईडी (E0000000653) से बदलकर नई आईडी (MPES0000010) कर दी गई। इसी तरह अन्य कर्मचारियों की आईडी भी बदली गईं, जिससे उनका पिछला सेवा रिकॉर्ड शून्य जैसा दिखने लगा है और वे ग्रेच्युटी के हक से वंचित हो रहे हैं।

  • मानसिक शोषण और धमकी का आरोप: कर्मचारियों का यह भी कहना है कि विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है और सुपरवाइजरों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है, जिससे वे भारी मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।

  • सीएमएचओ को सौंपा ज्ञापन: अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित कर्मचारियों ने भोपाल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मनीष शर्मा को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उनकी पुरानी और नई आईडी को जोड़ा जाए तथा ग्रेच्युटी के भुगतान का लिखित आश्वासन दिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे सेवाएं देने में असमर्थ हो जाएंगे।

एनएचएम और एजेंसी का पक्ष

इस पूरे मामले पर जब 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन करने वाली ‘जय अंबे’ कंपनी के मैनेजर तरुण सिंह परिहार से संपर्क करना चाहा, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया या जवाब नहीं दिया गया।

वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की अपर मिशन संचालक दिशा प्रणय नागवंशी ने कहा कि 108 एम्बुलेंस एजेंसी को एनएचएम की ओर से केवल वाहनों के संचालन का भुगतान किया जाता है, जबकि कर्मचारियों का वेतन और अन्य प्रबंधन एजेंसी खुद संभालती है, इसमें एनएचएम की सीधी भूमिका नहीं होती। हालांकि, मीडिया के माध्यम से मामला संज्ञान में आने के बाद एजेंसी से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

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